कठुआ। इस वर्ष के पहले सूर्यग्रहण पर आस्थावानों ने अपनी श्रद्धाभक्ति दिखाई और ग्रहणकाल मे भजन कीर्तन करते रहे। मोक्ष के पश्चात लोगों ने स्नान कर दानकर पुण्यलाभ कमाया। इसके बाद घरों में चूल्हे जले।
कई आस्थावानों ने शनिवार की रात करीब 10 बजे सूतक लगते ही भजन कीर्तन और मंत्रों का जाप शुरू कर दिया था। कुछ लोगों ने रविवार की सुबह ग्रहण काल से पहले ही भोजन आदि ग्रहण कर लिया था लेकिन अधिकांश लोगों ने ग्रहण के मोक्ष के पश्चात स्नान ध्यान कर पुरोहितों को दान देकर पुण्यलाभ कमाया और उसके पश्चात घरों में चूल्हे जलाए। ग्रहण काल में पूरे समय मंत्र और भजन चलता रहा।
बसोहली में लोग सूर्य ग्रहण देखने का उत्साहित रहे। बुजुर्ग लोग घरों में परिवार के सदस्यों को सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण की कहानियां सुनाईं तो कई लोगों ने इसके वैज्ञानिक तथ्य से बच्चों को अवगत कराया। पुरोहितों ने लोगाें को ग्रहण काल में घटित होने वाले फलों के बारे में बताया। लोग सूर्यग्रहण देखकर अपनी जिज्ञासा शांत किए।
सूर्य ग्रहण के समय घरों में ही किया दान पुण्य
महानपुर। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक लोग वर्षों बाद के बाद लगे सूर्य ग्रहण की भौगोलिक स्थिति देखने के लिए उत्साहित रहे जबकि सूर्य ग्रहण अपने समय के अनुसार दिखने लगा। जैसे-जैसे समय बीतता गया सूर्यग्रहण अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया। लोगों ने इस नजारे को अपने घरों से ही देखा वहीं लोगों ने सूर्य ग्रहण के समय अपने अपने घरों में भगवान का जप किया और पुण्य दान भी किया। सूर्य ग्रह ग्रहण समाप्त होते ही लोगों ने पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान किया और भगवान से सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। हालांकि सूर्य ग्रहण के समय सभी मंदिरों के कपाट बंद रहे। संवाद
सूर्य ग्रहणकाल में मंदिरों में किया पूजा पाठ
बिलावर। रविवार को दृश्य मान होने वाले सूर्य ग्रहण के समय लोगों में ग्रहण काल में पूजा जाप किया और पुण्य के भागीदार बने। उप जिला के चित्र गुप्त, गंगा गुरुनाल और पंचतीर्थी के साथ अन्य कई इलाकों में देव स्थानों पर पहुंचकर लोगों ने मंदिरों में जाप किया और ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके पुण्य की प्राप्ति की। पंडित राधा कृष्ण शास्त्री के अनुसार ग्रहण काल का अनुष्ठान और ग्रहण के बाद दान करने से घर में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है।। पंडित दर्पण रैना के अनुसार ग्रहण काल में पवित्र नदियों में स्नान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। संवाद