कश्मीर में हिंसक भीड़ पर नियंत्रण पाने के लिए पेलेट गन का इस्तेमाल करने पर जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने केंद्र को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि अपने लोगों के साथ ऐसा बर्ताव नहीं किया जा सकता है। हालात को देखते हुए तो ऐसा ही लगता है कि सरकार भीड़ नियंत्रण के दौरान लोगों को अपना समझकर ट्रीट नहीं कर रही।
चीफ जस्टिस एन पाल वसंथाकुमार और जस्टिस मुजफ्फर हुसैन अतर की पीठ ने केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे असिस्टेंट सालिसिटर जनरल आफ इंडिया से कहा कि आप कह रहे हैं पेलेट गन का इस्तेमाल सीआरपीएफ के प्रशिक्षित बल कर रहे हैं, लेकिन, ये नहीं बता पा रहे कि घायलों के जख्म घुटने के नीचे तक होने बजाय शरीर के ऊपरी भाग पर कैसे आए।
आखिर क्यों ज्यादातर जख्मी लोगों की आंखें पेलेट गन के छर्रों का निशाना बनी हैं। अदालत ने असिस्टेंट सालिसिटर जनरल आफ इंडिया से कहा कि आप भीड़ को नियंत्रित करने की ड्यूटी दे रहे हैं लेकिन यह काम सभ्य समाज में ऐसे नहीं किया जाता।
ये लोेग किसी दूसरे ग्रह से आए एलियन नहीं हैं। इन्हें अपना समझकर ट्रीट करें। हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करते हुए केंद्र ने सफाई में बताया जम्मू कश्मीर में कायदा कानून की समस्या से निपटने के लिए सीआरपीएफ के प्रशिक्षित लोगों को तैनात किया गया है।
सीआरपीएफ की प्रत्येक बटालियन में सात कंपनियां होती हैं जिन्हें रोटेशन में आधुनिक प्रशिक्षण दिया जाता है। अमरनाथ यात्रा के लिए जून 18 से यात्रा समाप्ति तक घाटी में 60 कंपनियां तैनात की गईं हैं। इनके अलावा 54 कंपनियों की अतिरिक्त तैनाती की गई है जो विशेष प्रशिक्षण प्राप्त हैं और भीड़ नियंत्रण की ड्यूटी को पेशेवर तरीके से अंजाम देने में सक्षम हैं।