पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को कहा कि उनकी पार्टी का एकमात्र एजेंडा संवाद, विकास और क्षेत्रीय एकता के जरिए जम्मू-कश्मीर में शांति और समृद्धि की बहाली है।
पीडीपी गरिमा और सम्मान के साथ शांति चाहती है और इसके लिए आपसी संवाद जरूरी है, जैसा कि अटल बिहारी वाजपेयी के दौर में उनके पिता और पीडीपी संस्थापक मुफ्ती मोहम्मद सईद ने करके दिखाया था। उस समय जम्मू-कश्मीर के भीतर और पाकिस्तान के साथ भी बातचीत हुई थी और पुंछ-रावलाकोट व उड़ी ,मुजफ्फराबाद जैसे मार्ग खोले गए थे।
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हालात बेहतर होने पर सेना को बैरकों में लौटना चाहिए और दो बिजली परियोजनाएं या तो जम्मू-कश्मीर को वापस दी जाएं या उचित मुआवजा दिया जाए। पीडीपी चाहती है कि जम्मू-कश्मीर समृद्ध हो, एकजुट रहे और सरकार लोगों तक पहुंचे।
पीर पंंजाल और चिनाब घाटी को डिविजन स्तर का दर्जा देने की मांग को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस और भाजपा की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यह मांग पूरी तरह प्रशासनिक है और इसका मकसद उपेक्षित क्षेत्रों में संतुलित विकास और बेहतर शासन सुनिश्चित करना है। उन्होंने इस मांग को डिक्सन प्लान से जोड़ने को खारिज किया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए महबूबा ने कहा कि वह उनका सम्मान करती हूं, लेकिन शायद वे भूल गए हैं कि इसी तरह के फार्मूले के चलते उनके पिता शेख मोहम्मद अब्दुल्ला को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने साफ कहा कि डिक्सन प्लान कभी भी पीडीपी का एजेंडा नहीं रहा।
पीर पंंजाल क्षेत्र सीमा पर भारत-पाक तनाव का सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतता है। जबकि चिनाब घाटी पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है और प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में रहती है। ऐसे में इन क्षेत्रों को प्रशासनिक रूप से सशक्त करना जरूरी है।
भाजपा पर निशाना साधते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि पार्टी उनकी मांग को पाकिस्तान और डिक्सन प्लान से जोड़कर गलत प्रचार कर रही है, जबकि 2019 में लद्दाख को अलग कर राज्य की सीमाएं पहले ही बदली जा चुकी हैं। पीडीपी न तो पीर पंंजाल और चिनाब घाटी को कश्मीर में मिलाना चाहती है और न ही अलग करना, बल्कि दोनों को अलग डिविजन का दर्जा देकर लोगों को राहत देना चाहती है।