जम्मू-कश्मीर में पार्टी पर परिवारवाद का आरोप लगने के बाद पीडीपी को बिखरने से रोकने के लिए पीडीपी प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने नया दांव खेला है। उनके इशारे पर सोमवार को उनके मामा सरताज मदनी समेत पार्टी के सभी पदाधिकारियों ने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसकी पुष्टि पार्टी प्रवक्ता रफी मीर ने की है। मदनी ने कहा है कि उन्होंने यह कदम पार्टी के व्यापक हित में उठाया है। इस मुद्दे पर पार्टी के कई विधायक बागी तेवर अपनाए हुए हैं।
पीडीपी के बागी विधायक व पूर्व मंत्री इमरान रजा अंसारी व उनके चाचा आबिद अंसारी ने खुले तौर पर महबूबा मुफ्ती पर भाई-भतीजावाद का आरोप लगाया था। साथ ही पार्टी अध्यक्ष के फैसलों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि पार्टी अध्यक्ष ने अपने को चारो ओर से रिश्तेदारों व मित्रों से घेर रखा है। इस आरोप के लगभग तीन सप्ताह बाद सरताज मदनी ने इस्तीफा दिया है। उन्होंने कहा कि वे पार्टी अध्यक्ष को इस्तीफा सौंप चुके हैं। उन्होंने पार्टी की स्थिरता व एकता के लिए व्यापक हित में त्यागपत्र दिया है।
पांच विधायक व दो एमएलसी खुलेआम कर चुके हैं विरोध
भाजपा के समर्थन वापसी से सरकार गिर जाने के बाद पीडीपी में विद्रोह की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। पांच विधायकों व दो एमएलसी ने खुलेआम महबूबा का विरोध किया था। पूर्व मंत्री व विधायक अब्दुल मजीद पाडर ने तो यहां तक दावा किया था कि जल्द ही रियासत में नई सरकार अस्तित्व में आएगी। इसके लिए 51 विधायकों का समर्थन है।
मुफ्ती ने संभाली खुद कमान
पार्टी विधायकों के बागी तेवर अपनाने के बाद सक्रिय हुईं महबूबा ने पार्टी में डैमेज कंट्रोल की बागडोर खुद संभालते हुए उत्तरी, दक्षिणी व मध्य कश्मीर के नेताओं व प्रमुख पार्टी कार्यकर्ताओं से अलग-अलग बैठकें कर उनकी बातें सुनीं। तीनों क्षेत्रों की बैठकें पूरी होने के बाद सरताज मदनी ने इस्तीफा दिया। माना जा रहा है कि महबूबा ने पार्टी को टूटने से बचाने तथा बागी विधायकों के पार्टी में बने रहने के लिए यह कदम उठाया है।
महबूबा के भाई को लेकर भी है नाराजगी
महबूबा मुफ्ती के भाई तस्सदुक मुफ्ती को भी लेकर विधायकों में आक्रोश है। बागी विधायकों ने आरोप लगाया था कि उसे मुंबई से लाकर विधान परिषद सदस्य बनाया गया और फिर मंत्री पद से नवाजा गया। इसके विपरीत पार्टी में पिछले कई वर्षों से काम करने वालों को दरकिनार रखा गया।
महबूबा ने दी थी धमकी
पार्टी में टूट फूट की आशंका के मद्देनजर महबूबा ने पिछले दिनों शहीदी दिवस पर केंद्र पर आरोप लगाया था कि यदि उसने पार्टी तोड़ने की कोशिश की तो 1987 जैसे हालात पैदा होंगे। जिस तरह से हिज्ब प्रमुख सलाहुद्दीन व जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक पैदा हुए थे वही स्थिति उत्पन्न होगी। इसकी केंद्र के साथ नेकां ने भी तीखी आलोचना की थी। इसके विरोध में देश में कई जगह विरोध प्रदर्शन भी हुए थे।