घाटी में लगातार हो रही पत्थरबाजी व सुरक्षा बलों को निशाना बनाए जाने तथा अलगाववाद की भावना भड़काए जाने की कोशिशों से प्रभावी तरीके से निबटने की सरकार ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। सरकार की कोशिश है कि पत्थरबाजी में शामिल युवाओं के अभिभावकों से बातचीत कर उन्हें रास्ते पर लाया जाए।
सेना की ओर से सद्भावना कार्यक्रमों के जरिये भटके युवाओं में विश्वास बहाली की जाए। इसके साथ ही उनमें घिर गई असुरक्षा की भावना को दूर कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जाए। सूत्रों ने बताया कि पुलवामा में डिग्री कालेज के छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई के बाद पूरी घाटी में भड़के छात्र उपद्रव से विचलित मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पिछले दिनों श्रीनगर में कैबिनेट मंत्रियों, पार्टी पदाधिकारियों तथा आला अफसरों के साथ बैठक कर इस स्थिति पर विचार किया।
बैठक में ज्यादातर लोगों की राय थी कि युवाओं को भड़काया जा रहा है। इनमें मुख्य धारा की पार्टियां भी शामिल हैं। यह सरकार को लगातार अस्थिर करने की साजिश भी हो सकती है। ऐसे में सबसे ज्यादा जरूरी है कि युवाओं को समझाया जाए। इसमें उनके अभिभावकों की मदद ली जाए।