जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती के बयान पर तूफान उठ खड़ा हुआ है। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने महबूबा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव का वक्त है। उनकी पार्टी टूट रही है। खराब हाल में है। वह इसी किस्म के सपोर्ट से ताकत में आई थीं। उनको गंभीरता के साथ लेने की जरूरत नहीं है। हमारे सुरक्षा बलों का मनोबल किसी महबूबा मुफ्ती के बयान से नहीं गिरने दिया जाएगा।
राज्यपाल ने कहा कि वह सुरक्षा बलों के साथ खड़े हैं। जहां कहीं भी अत्याचार होगा, कार्रवाई की जाएगी। पुलिस में इस प्रकार के कुछ मामले आने पर कार्रवाई की गई है, जिसमें सभी का ट्रांसफर कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि महबूबा की मांग विधानसभा चुनाव के नजदीक आने के कारण लोगों का समर्थन जुटाने के मद्देनजर है।
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ट्वीट किया कि मानवाधिकार को लेकर चुनिंदा मामलों में निंदा की जाती है। ऐसे नेता मुठभेड़ में किसी आतंकी के मारे जाने पर त्वरित संवेदना जताते हैं, लेकिन ड्यूटी कर रहे सुरक्षा बलों के जवानों को संवेदना के एक शब्द भी नहीं मिलते हैं।
महबूबा ने राज्यपाल की टिप्पणी पर ट्वीट किया कि वह स्तब्ध हैं कि संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति कितनी बेशर्मी से पक्ष ले रहा है। नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने महबूबा को लेकर राज्यपाल की ओर से दिए गए बयान पर ट्वीट किया कि गवर्नर साहब यह स्वीकार करने योग्य बयान नहीं है। साथ ही यह राजनीति में अनावश्यक हस्तक्षेप है। यदि ऐसा ही चलता रहा तो ज्यादा समय नहीं लगेगा जब लोग राजभवन को गंभीरता से लेना बंद कर देंगे।