राज्य में सियासी अस्थिरता बरकरार है। भाजपा ने गेंद पीडीपी के खेमे में डाली है। वहीं पीडीपी खामोश रहकर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है।
पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद से ही जम्मू-कश्मीर में राजनैतिक स्थिरता बनी हुई है। सरकार गठन में पीडीपी के मौन धारण से यह और गहरी होती दिख रही है।
सूत्रों के अनुसार पीडीपी विधायकों ने महबूबा मुफ्ती को यह आश्वासन दिया है कि जो फैसला वह करेंगी, वह पार्टी को मंजूर होगा। जानकारी यह भी है कि महबूबा ने अभी कोई फैसला नहीं लिया है, क्योंकि वह अभी भी सदमे में हैं। इस कारण फैसला लेने में अभी वक्त लग सकता है।
पीडीपी गठबंधन में अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहती है
सूत्रों की मानें, तो पीडीपी गठबंधन में अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहती है, ताकि वह और सौदेबाजी कर सके। पीडीपी के तेवरों से लगता है कि वह अपना पलड़ा भारी कर फिर से राज्य के उन मुद्दों पर बातचीत कर सकती है और भाजपा से लिखित तौर पर आश्वासन लेना चाहेगी, जिनपर पिछले एक साल में विवाद रहा है।
इन मुद्दों में खास तौर पर अनुच्छेद 370, 35ए और राज्य के झंडे का सम्मान, जिसके खिलाफ भाजपा अतीत में एजेंडा आफ एलाइंस में होकर भी निभा नहीं पाई। पीडीपी फिलहाल खुलकर कुछ भी नहीं बताती दिख रही। न ही कोई शर्त अब तक भाजपा के सामने रखी गई है।
भाजपा सरकार का जल्द गठन करना चाहती है। वहीं केंद्र की ओर से साफनिर्देश है कि कोई नई शर्त नहीं होगी। भाजपा नेता डा. निर्मल सिंह ने भी इस बात को साफ कर दिया है कि शर्तों को लेकर जो भी अटकलें लगाई जा रही हैं, सब बेबुनियाद हैं। पीडीपी द्वारा कोई शर्त नहीं रखी गई है अभी तक।
भाजपा के महासचिव राम माधव ने साफ की स्थिति
इसके अलावा भाजपा के महासचिव राम माधव ने भी साफ कर दिया है कि दोनों पार्टियों की ओर से कोई नई शर्त नहीं है। उनकी बातों से यह साफ इशारा मिलता है कि गठबंधन जो था, वैसा ही चलेगा।
लेकिन, पीडीपी जल्द स्पष्ट करे कि सरकार का गठन कब किया जाएगा। भाजपा के कई नेता रोटेशनल मुख्यमंत्री की बात तो करते दिखे, लेकिन उन मांगों को अनदेखा किया गया।
जम्मू-कश्मीर में फिलहाल राज्यपाल शासन है। इसलिए पीडीपी भी जल्दी में नहीं दिख रही। पार्टी की चुप्पी से इशारा मिलता है कि जम्मू-कश्मीर को नई सरकार मिलने में अभी वक्त लग सकता है।