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दिल्ली से पहले जम्मू कश्मीर में बन जाएगी भाजपा की सरकार

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भाजपा और पीडीपी में न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर सहमति के बाद नई सरकार के गठन की राह आसान हो गई है। दोनों दलों की ओर से 9 फरवरी के पहले सरकार बनाने का दावा पेश किए जाने की संभावना है।
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सभी विवादास्पद मुद्दों को ठंडे बस्ते में डालकर कामन मिनिमम प्रोग्राम पर सहमति बनी है जिसमें विकास को समझौते का आधार बनाया जा रहा है। विवादास्पद मुद्दों पर भाजपा और पीडीपी का स्टैंड यथावत रहेगा और सरकार सीएमपी के आधार पर बनाई जाएगी।

इस तरह दोनों दलों के लिए अपने वोट बैंक को संतुष्ट करना आसान हो जाएगा। जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के समान विकास का संकल्प गठबंधन का मूल मंत्र बन रहा है। इसके साथ ही भाजपा और पीडीपी ने राज्यसभा चुनाव में सभी चार प्रत्याशियों को जिताने की रणनीति पर भी काम शुरू कर दिया है।
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केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने संभाली कमान

केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह को निर्दलीय और अन्य विधायकों से बातचीत की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जितेंद्र सरकार गठन के संबंध में पीडीपी से होने वाली अधिकृत बातचीत में भी शामिल रहेंगे। गुजरात दौरा रद्द कर वीरवार को जम्मू पहुंचे जितेंद्र सिंह ने पार्टी के कोर ग्रुप के साथ भी बैठक की।

भाजपा और पीडीपी को समझौते के इस पड़ाव तक पहुंचने में 35 दिन लग गए। मुख्यमंत्री तथा मंत्रियों के शपथ ग्रहण तक का सफर तय करने में अभी कम से कम दस दिन और लग सकते हैं। दोनों दलों के सूत्र संकेत दे रहे हैं कि अनौपचारिक वार्ता का दौर खत्म हो चुका है और अब टेबल पर औपचारिक बातचीत एक-दो दिन में शुरू हो सकती है।

हालांकि, सारे मुद्दे तय कर ड्राफ्ट बना लिया गया है। लिहाजा, टेबल पर बातचीत की औपचारिकता के बाद सीएमपी का ऐलान भर किया जाना है। इसके बाद गवर्नर एन एन वोहरा से मिलकर आधिकारिक तौर पर सरकार बनाने के दावे की रस्म भी पूरी कर ली जाएगी। भाजपा का प्रयास है कि दिल्ली के साथ ही जम्मू कश्मीर में भी सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।

ऐसे बनी दोनों दलों में सहमति

भाजपा की ओर से महासचिव राम माधव और पीडीपी की ओर से डॉ. हसीब द्राबू ने समझौते की पटकथा लिखी। माधव और द्राबू के बीच कई दौर में श्रीनगर और दिल्ली में बातचीत हुई। विवादास्पद मुद्दों पर भी खुलकर चर्चा की गई।

वार्ता जहां कहीं भी अटकी तब केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद से बातचीत कर रास्ता निकाला। राम माधव भाजपा के रणनीतिकार हैं। उधर, पीडीपी से राजपोरा से विधायक बने डॉ. हसीब द्राबू आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ, पूर्व बैंकर और जाने माने रणनीतिकार हैं।

बातचीत में भ्रम की स्थिति से बचने के लिए पीडीपी ने अपने सभी नेताओं पर सार्वजनिक रूप से बयान देने पर रोक लगाया और पूर्व आईएएस मुख्य प्रवक्ता नईम अख्तर को बयान देने को अधिकृत किया।
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नेकां से एक दिन में ही टूट गई थी वार्ता

भाजपा ने पहले नेकां के साथ मिलकर सरकार बनाने का प्रयास किया था। तब भाजपा का प्रयास था कि नेकां भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनाने को सहमत हो जाए। इसके लिए जेटली ने अपने गैर राजनीतिक मित्रों की मदद से लंदन में इलाज करा रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री फारूक अब्दुल्ला ने भी बातचीत की थी।

फारूक ने अपने पुत्र उमर अब्दुल्ला पर ही सारा मामला छोड़ दिया। उमर चाहते थे कि भाजपा उनको सीएम पद सौंपे। इस पर बात नहीं बनी और वार्ता टूट गई। उमर की अमित शाह, जेटली और राम माधव से मुलाकात भी हुई थी। वार्ता टूटने के बाद दोनों ने मुलाकात की बात से इनकार कर दिया। भाजपा ने नेकां के समर्थन की उम्मीद में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को विधायक दल का नेता बनाया था। इस निर्णय पर यू टर्न लेना पड़ा।

पीडीपी और भाजपा में सरकार बनाने पर हुई सहमति में अनुच्छेद 370 और अफस्पा जैसे मुद्दे ठंडे बस्ते में पड़े रहेंगे। दोनों दल इस मुद्दे पर चुप रहकर यथा स्थिति कायम रखेंगे। अनुच्छेद 370 का मामला संवैधानिक व्यवस्था और अफस्पा का मुद्दा सेना की जरूरतों पर छोड़ दिया गया है।
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