जम्मू से कठुआ, सांबा, अखनूर, आरएस पुरा और कटड़ा रूट के लिए नहीं चली बसें
कटड़ा रूट पर सरकारी बसों की संख्या कम होने से टिकट के लिए देर तक करना पड़ा इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू जिले में वीरवार को ट्रांसपोर्टरों ने ई-बसों के परिचालन में मनमर्जी का आरोप लगाते हुए यात्री वाहनों का चक्का जाम रखा। इसका असर शहर के अलावा कटड़ा, कठुआ, सांबा, अखनूर, ज्यौड़िया, खौड़, मढ़ गजनसू, मकवाल जैसे लंबे रूटों पर देखने को मिला। यहां के लिए यात्री वाहन नहीं चलने से लोग प्रभावित हुए। उन्हें मजबूरन निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा।
जम्मू-कटड़ा रूट सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। मां वैष्णो के दरबार जाने वाले यात्री दिनभर परेशान रहे। जम्मू रेलवे स्टेशन स्थित बस स्टैंड से कटड़ा के लिए निजी बसें नहीं चलने से यात्रियों की दिक्कतें बढ़ गईं। ऐसे में सारी निर्भरता सरकारी बसों पर हो गई। वहीं, कटड़ा रूट पर सरकारी बसों की संख्या कम होने से लोगों को टिकट के लिए कई घंटे तक इंतजार करना पड़ा। इसके बावजूद कई यात्रियों को टिकट नहीं मिला। टिकट काउंटर पर लंबी लाइनें यात्रियों की परेशानी को बयां कर रही थीं।
उत्तर प्रदेश के हरदोई से 30 लोगों का दल वैष्णो देवी जाने के लिए ट्रेन से जम्मू पहुंचा था। सुबह जब वह ट्रेन से पहुंचे, तो उन्हें नहीं पता था कि यहां ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल है। इस दल में शामिल सुमित ने कहा कि पता होता, तो वैष्णो देवी तक ट्रेन में ही जाते। एक अन्य यात्री चंदन गुप्ता ने कहा कि दो घंटे तक लाइन में खड़ा रहा, लेकिन कटड़ा के लिए टिकट नहीं मिली। उन्होंने बताया कि टिकट काटने वाले ने कहा कि एक साथ 30 टिकट नहीं दे सकते हैं। इस कारण सभी को परेशानी झेलनी पड़ी है। वहीं, यात्री अनिल ने कहा कि बसें कम होने की वजह से टिकट के लिए मशक्कत करनी पड़ी। देश के अन्य राज्यों से पहुंचे पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भी देर शाम तक गंतव्य तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
जम्मू रेलवे स्टेशन से कटड़ा के लिए प्रतिदिन 70 के करीब बसों का संचालन होता है। वीरवार को हड़ताल के कारण जेकेआरटीसी 30 के करीब ही बसों का संचालन कर पाया। इसी तरह की स्थिति आरएस पुरा, अखनूर, बाड़ी ब्राह्मणा जाने वाले यात्रियों को पेश आई।
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शहर में ई-बसों ने संभाला मोर्चा
जिन ई-बसों के संचालन के विरोध में ट्रांसपोर्टराें ने हड़ताल की थी, वीरवार को उन्हीं बसों ने मोर्चा संभाला और परेशान हाल यात्रियों को राहत दी। लोगों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए दिनभर ई-बसें दौड़ती रहीं। शहर में अधिकांश रूट पर ई-बसों के साथ जेकेआरटीसी की बसों का परिचालन हुआ। इससे लोगों को बहुत हद तक राहत मिली। हालांकि कई रूटों पर बसों की संख्या कम होने से लोग परेशान भी हुए। उन्हें बस के लिए काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। सरकारी कर्मी, स्कूली बच्चों और दैनिक यात्रियों को समय पर पहुंचने में दिक्कत आई।
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ई-रिक्शा वालों की रही चांदी
शहर में मेटाडोर चालकों ने भी परिचालन बंद रखा। इस दौरान ई-रिक्शा चालकों की चांदी रही। कुछ यात्रियों का कहना था कि ई-रिक्शा चालकों ने मनमाना किराया वसूला। एक यात्री का कहना था कि उससे आठ किमी के लिए 200 रुपये किराया लिया गया। वहीं एक अन्य यात्री ने कहा कि तीन से पांच किमी के लिए 100 रुपये देने पड़े। उनका कहना था कि विकल्प न होने की वजह से मजबूरन ई-रिक्शा में ज्यादा पैसे देकर सफर करना पड़ा।