फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रुपये वाले मंदिर में पूरी होती है हर मुराद

विज्ञापन
विज्ञापन
जम्मू का पंचवक्तर महादेव मंदिर शिव रहस्यों से भरा हुआ है। सैकड़ों साल पुराने इतिहास को संजोए पंचवक्तर महादेव मंदिर जम्मू शहर के विश्व प्रसिद्ध रघुनाथ मंदिर से करीब दो सौ मीटर दूर स्थित है। यहां भी बड़ी संख्या में शिव भक्त रोजाना पहुंचते हैं। लगभग बीस कनाल में विस्तृत मंदिर परिसर में मंदिरों का समूह मौजूद है, जिसमें यहां के महंतों की समाधियां भी मौजूद हैं।
विज्ञापन


महादेव पंचमुखी हैं और यह शिवलिंग आपशंभू प्रकट हुए माने जाते हैं। वहीं, चांदी के सिक्के जड़े होने के कारण जम्मू में इसे रुपये वाले मंदिर के रूप में भी प्रसिद्धि है। जम्मू के पंचवक्तर मोहल्ले में इस महादेव मंदिर का निर्माण तब हुआ था, जब यहां पर जंगल था। इस मंदिर में हर प्रकार के शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।

चालीस दिनों तक लगातार शिव पूजन करने वाले शिवभक्तों की यहां हर मुराद पूरी होती है। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ प्रतिदिन रुद्राभिषेक होता है। चांदी के सिक्कों से सजा मंदिर का परिसर और महादेव मंदिर के  प्रवेश द्वार अपनी विशेषता और भव्यता के लिए भी ऐतिहासिक है। हालांकि इस मंदिर परिसर में चांदी के सिक्कों को जड़ा जाता है, ताकि इसकी महत्ता बनी रहे।
विज्ञापन


यहां महाशिवरात्रि की तैयारियां जारी हैं। यहां सोलह फरवरी से ही शिव भक्त एकत्र होने लगते हैं। महाशिवरात्रि की रात चार चरणों में विशेष पूजा होती है। मंदिर के सेवकों और पुजारियों द्वारा मंदिर में सजावट का काम करवाया जा रहा है। यहां पर गोशाला भी है, जिसमें चालीस देसी गाय हैं, जिनके दूध से रुद्राभिषेक होता है।
विज्ञापन

14वीं शताब्दी में अस्तित्व में आया मंदिर

पंचवक्तर महादेव मंदिर के इतिहास के बारे में यहां पंडित आचार्य सूर्यमणि शर्मा ने बताया कि आदि शंकराचार्य यहां पर अपने भ्रमण के दौरान आए थे। वहीं पुरातत्व और आध्यात्मिक महत्व लिए इस मंदिर का वर्णन मिलता है। गुरुनानक देव भी यहां पर ठहरे थे और इस प्रकार की सुंदर पेंटिंग एक मंदिर के गर्भगृह में मौजूद है।

1914 में जम्मू कश्मीर में मंदिरों की जब एक सूची तैयार हुई तो इस मंदिर के बारे में उल्लेख मिलता है कि यहां से बाबा अमरनाथ जी की यात्रा निकलती थी और यह मंदिर साधु संतों का पड़ाव था। बताया जाता है कि चौदहवीं शताब्दी में राजा माल देव के शासनकाल में यह मंदिर अस्तिव में आया था।

पंचमुखी महादेव के बारे में पुजारी ने कहा कि इसमें शिव की पांच शक्तियां निहित हैं, जिसमें रुद्र, अघोर, वामदेव, तट पुरुष और इशान शामिल हैं। कश्मीर शैव दर्शन के आधार पर पंचवक्तर महादेव को सछंद भैरव भी कहा जाता है। उल्लेखनीय है कि महाराज प्रताप सिंह यहां पर आए थे और श्रद्धापूर्वक महादेव के शिवलिंग जलैरी का जीर्णोद्धार कराया था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें