संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। ऑल जम्मू एंड कश्मीर पंचायत कांफ्रेंस (एजेकेपीसी) ने वीरवार को यूटी प्रशासन को ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग के अस्थायी गार्डों/माली-चौकीदारों के सभी मुद्दों को हल करने के लिए 30 नवंबर तक छह महीने का अल्टीमेटम दिया है।
इस मौके पर एजेकेपीसी मुख्यालय में अध्यक्ष अनिल शर्मा ने कहा कि यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि यूटी सरकार ने इन लोगों की वास्तविक चिंताओं को दूर करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की है या कोई नीति नहीं बनाई है। उन्होंने कहा कि कश्मीर और जम्मू में ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों को एक दर्जन से अधिक ज्ञापन और पत्र सौंपने के बावजूद सरकार एक इंच भी आगे नहीं बढ़ी है और इन गरीब मालियों और चौकीदारों को समायोजित करने में अपनी अनिच्छा दिखा रही है। इन्हें सरकार की तरफ से विभिन्न सरकारी भवनों/पंचायत भवनों और अन्य बुनियादी ढांचे की स्थापना के लिए दी गई भूमि के बदले में सरकारी नौकरी देने का वादा किया गया था। उन्होंने कहा कि यूटी प्रशासन द्वारा अपनाए गए अड़ियल रवैये और सौतेले व्यवहार के कारण इन गरीब लोगों के परिवार भुखमरी के कगार पर हैं। उन्होंने कहा कि हम एक बार फिर सरकार से अनुरोध करते हैं कि इन लोगों को 9,000 रुपये के मासिक मानदेय पर अस्थायी दैनिक वेतनभोगी के रूप में समायोजित किया जाए ताकि वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें। संवाद
सरकार को तुरंत इन चौकीदारों और मालियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति शुरू करनी चाहिए, जिनकी संख्या जम्मू और कश्मीर में लगभग 2,000 है। उन्होंने कहा कि हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि सभी पंच और सरपंच और पूरा एजेकेपीसी मालियों और चौकीदारों व उनके परिवारों के साथ खड़ा है। अगर जल्द से जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू होगा।