केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा यहां भेजी गई टीम ने बिजबिहाड़ा से पांपोर तक के हाईवे को ‘डेथ ट्रैप’ माना है। पांपोर हमले के बाद टीम ने राज्य में पूरे सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा की है। इस टीम ने अलग-अलग जांच एजेंसियों के विशेषज्ञों के साथ सुरक्षा से संबंधित हर पहलू की पड़ताल की।
जांच टीम ने यह भी उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार हाईवे की सुरक्षा को पुख्ता करने में मदद जांच एजेंसियों का सहयोग करेगी। पांपोर में सीआरपीएफ की बस पर हमले के बाद मंगलवार को दिल्ली में हुई एक अहम बैठक के बाद पहुंची इस टीम ने बुधवार को विशेषज्ञों के साथ टीम ने एक कानवाई के रूप में बिजबिहाड़ा और पांपोर का दौरा किया।
इस दौरान यह समझने की कोशिश की कि आतंकी किस तरह से हाईवे पर हमले करने में सफल हो रहे हैं। दक्षिण कश्मीर पुलिस के एक उच्च अधिकारी का कहना है कि आने वाले दिनों में आतंकी फिर हाईवे को निशाना बना सकते हैं। वह अपना प्रभाव जताने के लिए हमले की नई साजिश रच रहे हैं। ऐसे में पुलिस भी यह भी योजना बना रही है कि पांपोर और बिजबिहाड़ा के हिस्से को वीडियो कैमरों की नजर में रखा जाए।
उन्होंने बताया कि इस हिस्से में पिछले छह महीने के भीतर यह छठा आतंकी हमला है। वर्ष 2015 में 9 दिसंबर को पांपोर में दो आतंकी मारे गए थे, इसी महीने हमले में दो जवान घायल हुए, इसमें एक डीएसपी भी शामिल है। वर्ष 2016 में फरवरी महीने में पांपोर में ही सीआरपीएफ के दो जवान शहीद हो गए।
अप्रैल में आतंकियों ने सैन्य काफिले को निशाना बनाया। इसमें दो नागरिक घायल हो गए। 3 जून को बिजबिहाड़ा में आतंकियों के हमले में तीन बीएसएफ कर्मी शहीद हो गए। अब पांपोर हमले में आठ सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए।