पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई जम्मू संभाग में बड़े स्तर पर आतंकवाद को बढ़ावा देना चाहती है। इसके लिए वह आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के साथ मिलकर काम कर रही है। हिजबुल के लिए काम करने वाले आतंकियों को इंटरनेशनल बॉर्डर पर रहने वाले एक विशेष समुदाय के युवकों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश हो रही है।
हाल ही में सेना ने रेकी करने वाले दो जासूसों को पकड़ा था। इनकी जानकारी पर चार और जासूस पकड़े गए हैं। जिनको जम्मू में आतंकी गतिविधियां चलाने का जिम्मा दिया गया था।
कुछ दिन पहले सेना ने रत्नूचक आर्मी स्टेशन की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी करते हुए दो जासूसों को पकड़ा था। इनसे पूछताछ में पता चला था कि यह लोग हिजबुल मुजाहिदीन के लिए काम कर रहे थे। इनकी जिम्मेदारी सेना के ठिकानों की जानकारियां पाकिस्तान पहुंचाने की थी। इनसे पूछताछ करने के बाद पुलिस ने चार और जासूसों को पकड़ा है।
कठुआ के रहने वाले सद्दाम हुसैन, मोहम्मद सलीम, मोहम्मद शफी और उधमपुर के बसंतगढ़ के रहने वाले सफदर अली को दबोचा गया है। यह लोग हिजबुल के जरिए सीधा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ जुड़े हुए थे। इन सबको जम्मू में आतंकी गतिविधियां चलाने का जिम्मा दिया गया था। यह लोग सीधा पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के अफसर इफितखार के साथ जुड़े हुए थे। वह इनका हैंडलर था और इनसे जम्मू, उधमपुर, डोडा, कठुआ के सैन्य ठिकानों की महत्वपूर्ण जानकारियां ले रहा था।
इनके पास से भी मोबाइल फोन मिले हैं। इनमें कई तरह की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी हो रखी है। जो पाकिस्तान में भेजी गई है। कुछ डाटा इन लोगों ने डिलीट कर दिया है। इनके मोबाइल फोन को डी कोडिंग के लिए लैब में भेजा गया है। इसके पहले कठुआ के नदीम अख्तर और डोडा के मुश्ताक मलिक को पकड़ा गया था।
जानबूझ कर कठुआ चुना
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ सालों से कठुआ के हीरानगर सेक्टर से बड़े पैमाने पर आतंकियों ने घुसपैठ की है। यह घुसपैठ वहां सक्रिय ओजी वर्करों के बिना संभव नहीं थी। पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई ने जानबूझ कर कठुआ जिले का बॉर्डर का इलाका चुना है, ताकि वह यहां के युवाओं से आसानी से जुड़ सके। सीमा पर रहने के चलते आसानी होगी। वह इनकी मदद से आतंकियों की घुसपैठ करवा सकते हैं और उनको आसानी से सैन्य ठिकानों तक हमला करने के लिए पहुंचा सकते हैं।