हुर्रियत कांफ्रेंस और कश्मीर को लेकर भारत के कड़े रुख से बेनकाब हो चुके पाकिस्तान ने अब नई चाल चली है। उसने अमेरिका और यूरोप में कश्मीरियों के नाम पर चल रहे छोटे-छोटे संगठनों की मदद से हुर्रियत को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर राज्य का असल नुमाइंदा दिखाने की साजिश रची है। इसकी जिम्मेदारी पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में बड़े पद पर रह चुके एक नेता को सौंपी गई है।
दरअसल, हुर्रियत के ज्यादातर नेता पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के सुर में सुर मिलाकर भारत में तो चर्चा बटोर लेते हैं, लेकिन, विश्व मीडिया और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उन्हें कोई जगह नहीं मिलती है।
दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र हो अथवा अमेरिका या यूरोप के मानवाधिकार मंच, कश्मीर मसले को उठाकर हर बार पाकिस्तान को फजीहत का सामना करना पड़ता है। इसीलिए एनएसए स्तर की वार्ता टूटने का ठीकरा अपने सिर फूटने से आहत पाकिस्तान सरकार ने कश्मीर को लेकर तुरंत ही नई चाल चल दी है।
उसने संयुक्त राष्ट्र के सामने प्रदर्शन को लेकर रणनीति बना रहे कुछ अमेरिकी संगठनों पर हुर्रियत नेताओं को भी न्यूयार्क बुलाने का दबाव बनाया है।