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सोकड़ गांव में पाकिस्तान ने दागे पचास से अधिक मोर्टार

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पुंछ में नियंत्रण रेखा के दूसरी ओर से की जा रही गोलाबारी से उठता धुआं। संवाद
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पुंछ। पाकिस्तानी सेना ने वीरवार को दिन भर जिले के कस्बा, कीरनी, शाहपुर सेक्टरों के दर्जन भर गांव को अपनी नापाक हरकत का निशाना बनाया। इस दौरान नियंत्रण रेखा पर शाहपुर सेक्टर के आखिरी गांव सोकड़ को निशाना बनाते हुए 50 से अधिक मोर्टार दागे। गोलाबारी में गांव के छह मकानों को नुकसान पहुंचा। इस दौरान गांव निवासी तुफैल हुसैन का परिवार बाल-बाल बच गया जब उसके मकान के ऊपर और आसपास चार गोले आकर गिरे। मोर्टार के टुकड़े कमरे की खिड़की को तोड़ते हुए घर के अंदर तक आकर गिरने लगे। कुछ टुकड़े उस कमरे में भी आए जहां तुफैल परिवार के साथ बैठा था।
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तुफैल ने बताया कि रमजान महीने में खुदा ने हमें और पूरे परिवार को बचा लिया। बताया कि दिन में तीन बज एक के बाद एक चार गोले मेरे मकान और आसपास गिरे। उस वक्त लगा कि बचना मुश्किल है। एक गोला खिड़की के रास्ते अंदर आया और वहां रखी आलमारी, ट्रंक, दीवारों, छत के पंखे तो क्षतिग्रस्त हुए ही, जिस पलंग पर मैं, मेरी पत्नी और चार माह की बेटी बैठे हुए थे उस पलंग में सुराख हो गया। तुफैल ने बताया कि गोले के टुकड़े से उसके चेहरे पर हल्की चोटें आईं। पत्नी को कम चोट लगी लेकिन धमाकों की आवाज से बेटी बेहोश हो गई। पत्नी रोने लगी और मैं बेटी हार्ट को पंप करना शुरू किया। करीब आधे घंटे बाद उसे होश आया तो वह चीखने लगी। गांव में केवल तुफैल ही नहीं पूरे गांव का यही माहौल है। गांव वालों ने बताया कि दिन में 11 बजे शुरू हुई गोलाबारी से लोग घरों में दुबके तो शाम साढे़ सात बजे तक के बाद ही निकले जब गोलाबारी बंद हो गई। इफ्तारी के दौरान लोगों ने पानी पीकर रोजा खोला। गांव के 40 वर्षीय जफर का कहना है कि पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी से हम लोग बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। बस खुदा ही है जो हम लोगों की रक्षा कर रहा है। पाकिस्तानी सैनिकों की नापाक हरकतों पर उनका गुस्सा साफ चेहरे पर दिखाई दे रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि नियंत्रण रेखा से छह से आठ किलोमीटर दूर गांव में केंद्र की तरफ से मंजूर बंकर बनाए गए हैं, पाकिस्तानी चौकियों के सामने होने के कारण उन्हें आज तक आवंटित नहीं किए जा सके। नीचे की तरफ बन रहा सामुदायिक बंकर अभी अधूरा है। ग्रामीणों ने कहा कि गोलाबारी में जब हम एक कमरे से दूसरे कमरे तक नहीं जा सकते तो पाकिस्तानी चौकियों के सामने से भागकर किस तरह सामुदायिक बंकर में पहुंचकर जान बचाएंगे। कहा कि गांव में सरकार गांव में हर घर के सामने बंकर बनवाए तब कहीं हम सुरक्षित हो पाएंगे।
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