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जम्मू-कश्मीर: साल के पहले दिन पाकिस्तान ने बरसाए गोले, बाल-बाल बचा गांव का पूर्व सरपंच

Tue, 01 Jan 2019 08:31 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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इनसेट: पाकिस्तान द्वारा की गई गोलीबारी - फोटो : अमर उजाला
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पाकिस्तानी सेना ने मंगलवार को लगातार तीसरे दिन भी नियंत्रण रेखा पर युद्धविराम का उल्लंघन करते हुए पुंछ जिले के गुलपुर सेक्टर के करमाड़ा क्षेत्र में भारतीय सेना की चौकियों के साथ ही रिहायशी इलाकों को निशाना बना कर मशीनगनों से गोलीबारी की। इसका सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया। पाकिस्तानी सेना ने रिहायशी इलाकों को भी निशाना बना कर गोलियां दागीं, जिसमें गांव के पूर्व सरपंच मंजूर अहमद बाल-बाल बच गए। 
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पाकिस्तान की तरफ से गोलाबारी शुरू होने पर जैसे ही मंजूर अहमद अपनी दुकान बंद कर सुरक्षित स्थान की तरफ भागे एक गोली दुकान का शटर भेद कर पार निकल गई। पाकिस्तानी सेना की तरफ से दागी गई गोलियां गांव की मुख्य सड़क और खेतों में भी गिरी हैं। इससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया। 

मंगलवार की दोपहर करीब डेढ़ बजे करमाड़ा सेक्टर में पाकिस्तानी सेना की 24 फ्रंटियर फोर्स ने अपनी चौकियों बकरी मेन, बकरी-एक से सेना की 15 मराठा लाईट इन्फेंट्री की चौकियों चीता और सुसर के साथ ही रिहायशी इलाकों को निशाना बना कर यूनिवर्सल मशीनगनों से गोलाबारी शुरू की। सेना ने भी उसी क्रम में मुंहतोड़ जवाब देना शुरू कर दिया। देर शाम तक दोनों तरफ से रुक-रुक कर हल्के हथियारों से गोलाबारी जारी थी। 
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पाकिस्तान ने फायरिंग की रेंज बढ़ाई

करमाड़ा गांव के पूर्व सरपंच मंजूर अहमद ने बताया कि सोमवार को पाकिस्तानी सेना ने नए साल की पूर्व संख्या पर गोलाबारी की थी। उसके बाद मंगलवार को दोपहर में करीब डेढ़ बजे अचानक फिर गोलाबारी शुरू कर दी। जैसे ही गोलाबारी शुरू हुई तो वे और अन्य दुकानदार अपनी दुकानों के शटर गिरा कर सुरक्षित स्थान की तरफ भागे। तभी एक गोली उनकी दुकान के शटर को चीरती हुई पार हो गई। दूसरी गोली दुकान के बाहर सड़क पर गिरी। तीसरी गोली उनके नाशपाती के पेड़ से टकरा कर जमीन पर गिरी।

उसके बाद तो घंटा भर गोलियां गांव में गिरती रहीं। इससे करमाड़ा गांव के लोग डरे हुए हैं। इशरत हुसैन का कहना था कि पहले गोलाबारी केवल अग्रिम चौकियों और उसके आसपास के रिहायशी इलाकों में होती थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तानी सेना ने अपना रेंज बढ़ा दिया है। ऐेसे में अब करमाड़ा गांव के इस इलाके में, जो कि नियंत्रण रेखा से दूर है, वहां तक गोलियां पहुंच रही हैं। 
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