बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने पुंछ लाए थे पाकिस्तानी गोलाबारी ने बच्चे ही छीन लिए,अरूबा और अयान हर पाल साथ रहे और साथ ही खुदा के पास लौट गए। यह कहना है प्रोफेसर सरफराज मीर का। प्रोफेसर मीर पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी में पुंछ में एक साथ मारे गए जुड़वां बच्चों की बुआ के बेटे के बेटे हैं।
अपने ममेरे भाई बहनों को याद कर अपने आंसू नहीं रोक पा रहे हैं। मीर का कहना है कि मेरे मामा-मामी सरकारी शिक्षक हैं और उन्होंने इन जुड़वां बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए इसी वर्ष नगर के प्रतिष्ठित निजी स्कूल में दाखिला दिलवाया।
गांव कलानी मंडी के बजाए इस निजी स्कूल से मात्र 100 मीटर की दूरी पर किराए का मकान लेकर यहां रहने लगे थे। बच्चे अच्छी तरह पढ़ लिख कर कुछ बन जाएंगे। लेकिन हमें क्या पता था कि पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी हमसे इन बच्चों को ही छीन लेगी।
सरफराज का कहना है कि मंगलवार को जब देर रात को गोलाबारी शुरू हुई तो इन बच्चों के साथ माता-पिता ने बड़ी मुश्किल से रात काटी और सुबह उजाला होने के साथ ही इन बच्चों को लेकर गांव कलानी जाने की तैयारी की।
जैसे ही बच्चे किराए के मकान से बाहर निकल कर गाड़ी की तरफ जाने लगे तभी एक पाकिस्तानी गोला वहां आ कर गिरा। जिससे वह दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए और आसपास के मकानों में आग लग गई। जब बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया तो डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
हमें इस बात का अफसोस रहेगा कि काश हम बच्चों को गांव में ही पढ़ने देते तो वह हमसे हमेशा के लिए जुदा नहीं होते। आरूबा और अयान ने जैसे एक साथ जन्म लिया था वैसे ही वह अपने 12 वर्ष के छोटे से जीवन में हमेशा एक साथ रहे और फिर एक साथ हमें छोड़ कर चले गए।
केंद्रीय मंत्री ने दी श्रद्धांजलि
पुंछ के क्राइस्ट स्कूल के दो छात्रों की मृत्यु दुखद है। पूरा देश गुस्से में है। मैं दोनों मासूम बच्चों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और उनके परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।