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गूगल मैप से जानकारी लेकर गोले दाग रहा है पाक

Fri, 28 Oct 2016 02:56 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
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पाकिस्तानी रेंजर सीमा पर गूगल मैप से जानकारी लेकर सरहदी गांवों को निशाना बना रहे हैं। पाक रेंजरों के पास सरहदी गांव की पूरी जानकारी है। इसलिए वे बदल-बदल कर अलग-अलग सेक्टरों के गांवों में रिहायशी इलाकों में गोले दाग रहे हैं। यही एक सबसे बड़ी वजह है कि वे गांव भी गोलाबारी से प्रभावित हो रहे हैं, जहां अब तक गोले नहीं गिरे थे। 
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खुफिया सूत्रों का कहना है कि पाक रेंजर गूगल से भारतीय मैप लेकर गांव का नाम देख रहे हैं। इन गांवों में पाक रेंजर अपनी पोस्टों से दिशा तय कर रहे हैं। गांव की सरहद से दूरी तक देखी जा रही है। दूरी के हिसाब से मोर्टार के मार करने की दूरी तय की जा रही है।

इसके बाद ही गोले दागे जा रहे हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि पाक रेंजर सरहद पर भारतीय सीमा के इस तरफ ओवरग्राउंड वर्करों से सीमांत गांव की जानकारी ले रहे हैं। 
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दो दर्जन सीमावर्ती गांवों के लोगों ने पहली बार देखे गोले

दो दर्जन गांव में पहली बार पाक गोले गिरे - फोटो : Amar Ujala
यहीं कारण है, सीमा से सटे करीब दो दर्जन गांव में पहली बार पाक गोले गिरे हैं। दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां रहने वाले ग्रामीणों ने पहली बार गोले देखे हैं। अब तक ये लोग सरहद पर होने वाली गोलाबारी की आवाज सुनते आए हैं, जिससे बेखौफ होकर अपने कामकाज में लगे रहते थे, लेकिन अब आंखों के सामने गोले देखकर दहशत की जिंदगी जीने को मजबूर हो गए हैं। 

कानाचक से लेकर अरनिया तक दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां पहली बार पाक की ओर से गोले दागे गए हैं। इन गांव में गजनसू, गोपड़ बस्ती, सुचेतगढ़, घरानी, विधिपुर, रायपुर बस्ती आदि शामिल हैं। इन गांव में अब तक कभी गोले नहीं गिरे, लेकिन इस बार होने वाली गोलाबारी ने इन गांव के ग्रामीणों में दहशत फैला दी है। 
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आरएस पुरा सेक्टर में चालीस गांव खाली

ceasefire - फोटो : Amar Ujala
पाकिस्तानी गोलाबारी से दहशतजदा ग्रामीण अब तेजी से विस्थापन कर रहे हैं। आरएस पुरा सेक्टर के लगभग चालीस गांव खाली हैं। ऐसे में वही लोग घायल हो रहे हैं तो मवेशियों की देखभाल करने के लिए गांव में रुक रहे हैं।

अगर गांवों में ग्रामीणों की संख्या अधिक तो घायलों का आंकड़ा निश्चित अधिक होता। दरअसल, पाकिस्तान अब फायरिंग के रेंज में बढ़ाकर 120 एमएम के गोले दाग रहा है। पाक की इस गोलाबारी में कई सीमांत इलाकों में मवेशियों की मौत हो चुकी है। 
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