साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता डोगरी लेखक, कवि व कथाकार ज्ञान सिंह का निधन
चार महाकाव्य और दो कहानी संग्रह रचे, कुछ साल से अस्थमा और गुर्दे की बीमारी से जूझ रहे थे
जम्मू। प्रख्यात डोगरी लेखक, कवि और कथाकार ज्ञान सिंह पगोच मंगलवार सुबह दुनिया से रुख्सत हो गए। पटियाड़ी (हीरानगर) गांव स्थित आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। वह 78 वर्ष के थे। उन्होंने चार काव्यों के साथ दो कहानी संग्रह लिखे। शीराजां में भी कई कविताएं प्रकाशित हुईं। 2007 में महाकाव्य महात्मा विदुर के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। निधन की खबर सुनते ही साहित्यकारों में शोक की लहर दौड़ गई।
अपने पीछे वह पत्नी, दो बेटों, बेटी और पोते-पोतियों का परिवार छोड़कर गए हैं। पगोच के पुत्र और टेलीकॉम इंजीनियर शिवदर्शन ने बताया कि दो-तीन साल से ज्ञान सिंह अस्थमा और गुर्दे की बीमारी से जूझ रहे थे। इस कारण उनका लिखना बंद था।
जीवन भर खामोशी से डोगरी साहित्य साधना में जुटे रहे ज्ञान सिंह का जन्म 15 मई 1948 को हुआ था। सुप्रसिद्ध डोगरी कवि और नाटककार मोहन सिंह सलाथिया ने दुख जताते कहा कि पगोच लेखक, कथाकार से इतर भी बेहद उम्दा इंसान थे। उन्होंने खामोशी से काम किया। साहित्य अकादमी पुरस्कार मिलने के बाद भी बढ़िया लिखते रहे।
जम्मू विश्वविद्यालय में डोगरी विभागाध्यक्ष डॉ. सुषमा शर्मा ने उनके निधन को लेखकीय जगत की बड़ी क्षति करार दिया। उन्होंने कहा कि ज्ञान सिंह ने अकसर रामायण पर केंद्रित रचनाएं की। वे स्वभाव से बेहद सरल व्यक्ति थे।
जेयू में रहे असिस्टेंट रजिस्ट्रार
डोगरी लेखक, कवि और कथाकार ज्ञान सिंह पगोच ने लंबे समय तक जम्मू विश्वविद्यालय में कार्य किया। वह बतौर असिस्टेंट रजिस्ट्रार सेवानिवृत्त हुए। नौकरी के दौरान ही रचनाएं कीं। साहित्य अकादमी मिलने के बाद विश्वविद्यालय ने भी उन्हें इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया। साहित्य अकादमी ने आधिकारिक फेसबुक हैंडल के जरिये पगोच के निधन की सूचना पोस्ट कर श्रद्धांजलि अर्पित की। पोस्ट में कहा गया कि साहित्य में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
ज्ञान सिंह का रचना संसार
पुस्तकें : बाबा जित्तो, मतंगाश्रम, महात्मा विदुर, मन मोती ते मेल।
लघु कहानी संग्रह : गोपी, तरती दे चित्रगुप्त।