पल्ला सिपाइया डोगरेया, रोसलियां रोसिलयां धारा, तेरा बड़ा मंदा लगदा डोगरी गीत से पद्मा सचदेव ने जम्मू-कश्मीर के बाहर डोगरी को पहचान दिलवाई। यह वह डोगरी गाना है, जिस पर जम्मू में तैनात सैनिक लाउडस्पीकर लगाकर नाचते थे। आज जब इस गाने को बनाने वाली कवयित्री पद्मश्री पद्मा सचदेव नहीं रहीं, तो पूर्व सैनिकों की जुबां पर भी एक ही शब्द है, तेरा बड़ा मंदा लगदा।
यह गाना किशन समैलपुरी ने लिखा था। पद्मा सचदेव ने उस समय की सबसे मशहूर गायिका लता मंगेशकर से यह गाना गवाया था। इसके लिए लता मंगेशकर ने डोगरी सीखी थी। उस समय लता मंगेशकर और पद्मा सचदेव की काफी बनती थी। सेना से सेवानिवृत्त पूर्व मेजर जनरल गोवर्धन सिंह जमवाल ने पद्मा सचदेव के गाने पल्ला सिपाइया को फौजियों के लिए प्यार बताया। उन्होंने बताया कि उस समय डोगरा सैनिक किस कदर इस गाने पर झूमते थे। गोवर्धन जमवाल का कहना है कि उस समय वह सेना की 36 ब्रिगेड के कमांडिंग अफसर थे। बसंतर से जम्मू तवी के सभी सीमांत गांवों में जब उन्होंने दौरा किया, तब देखा कि इन गांवों में रहने वाले लोग और डोगरा सैनिक लाउडस्पीकर लगाकर उनके गाने पर झूमते थे। इसका जिक्र जब उन्होंने पद्मा सचदेव से किया तो पद्मा ने कहा कि वह इन गांवों में जाकर यह नजारा देखना चाहती हैं। डोगरा सैनिकों के सम्मान और उनके अंदर यह गाना जोश भरता था। बता दें कि इस गाने में एक शादीशुदा औरत के दिल के भाव हैं, जो पहाड़ों में रहती है। उसका पति फौजी है और वह अलग-अलग ऋतुओं को देखकर उसे घर बुुलाती है।
पद्मा सचदेव के निधन पर शोक व्यक्त किया
पूर्व सांसद डॉ. कर्ण सिंह ने प्रख्यात डोगरी कवि पद्मा सचदेव के निधन पर शोक व्यक्त किया। कहा कि पद्मा सचदेव के निधन से देश ने एक प्रमुख साहित्यकार खो दिया है और डोगरा भाषी समुदाय को भारी क्षति हुई है। कई दशकों में डोगरी साहित्य में पद्मा जी का योगदान अद्वितीय था और उनकी कविताओं को लाखों डोगरी भाषी लंबे समय तक याद रखेंगे। खराब स्वास्थ्य से जूझने के बावजूद, पद्मा जी एक सकारात्मक और रचनात्मक शख्सियत बनी रहीं। मैंने वास्तव में उनकी कई कविताओं का अंग्रेजी में अनुवाद किया है।
डोगरी भाषा में पद्मा सचदेव का योगदान सराहनीय
जम्मू। मॉरीशस में इंडिया गांधी सेंटर के निदेशक बलवंत ठाकुर ने आईजीसीआईसी फीनिक्स के सेमिनार हॉल में डोगरी साहित्यिक पद्मा सचदेव के निधन पर शोक व्यक्त किया। कहा कि पद्मा सचदेव डोगरी और हिंदी के सबसे प्रसिद्ध और अलंकृत लेखकों में से एक थीं। डोगरी भाषा और साहित्य के विकास के में उनका योगदान बड़ा अहम था।