राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कार प्रदान किए। इस भव्य समारोह में जम्मू-कश्मीर के डॉ. पद्मा गुरमेत, ब्रिज लाल भट और प्रोफेसर शफी शौक को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री भी मौजूद रहे। डॉ. पद्मा गुरमेत ने बौद्ध चिकित्सा पद्धति को पहचान दिलाई। गुरमेत का जन्म 15 अप्रैल 1971 हुआ। आयुष प्रणाली के तहत इस बौद्ध चिकित्सा पद्धति को औपचारिक पहचान दिलाने और इसके विकास में उनकी अग्रणी भूमिका रही। इन्होंने 12 पुस्तकें लिखीं। 1500 से अधिक चिकित्सा साहित्यों का कैटलॉग बनाते हुए 525 औषधीय पौधों का दस्तावेजीकरण किया। यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में सोवा-रिग्पा को शामिल कराने के लिए उन्होंने तकनीकी डोजियर तैयार किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग से उन्होंने 2019 में राष्ट्रीय संस्थान और लद्दाख में 10 हेक्टेयर का पहला ट्रांस-हिमालयी हर्बल गार्डन स्थापित किया है। लद्दाख के राज्य फूल और राज्य वृक्ष के चयन में भी तकनीकी समिति के अध्यक्ष के रूप में उनकी मुख्य भूमिका रही है।