विस्थापित कश्मीरी पंडित सन्नी रैना 20 साल से जम्मू में निजी कंपनी में नौकरी कर रहे हैं। हर साल क्वार्टर के लिए आवेदन करते है, लेकिन आश्वासन के सिवाए कुछ नहीं मिला है। सन्नी पहले किराये के कमरे में रहते है, जहां व छह हजार रुपये किराया दे रहे है। सन्नी से जैसे पांच सौ अधिक लोगों ने पांच सालों में क्वार्टर के लिए आवेदन किया है, लेकिन आजतक क्वार्टर की राह देख रहे हैं।
राहत और पुनर्वास विभाग के साथ कुल 44 हजार विस्थापित परिवार पंजीकृत है। इसमें 39868 परिवार हिंदू है, जबकि 2574 मुस्लिम, 1642 सिख और 5 अन्य परिवार शामिल हैं। इनमें से सिर्फ छह हजार परिवारों को ही क्वार्टर मिला है। वहीं, 42 हजार परिवार आज भी आशियाने की राह देख रहे हैं। वर्तमान में जम्मू संभाग में छह कैंप में परिवार छह हजार परिवार रह रहे हैं। इनमें से 42 सौ परिवार जगती टाउनशिप और दो सौ परिवार पुरखू और मुट्ठी में हैं। राहत और पुनर्वास विभाग लोगों को क्वार्टर नहीं दे पा रहा है और न विभाग की भविष्य में फिल्हाल क्वार्टर बनने की कोई योजना है।
सर्वे जारी, पात्र लोगों को दिया जाएगा क्वार्टर
राहत आयुक्त विभाग के एक अधिकारी के अनुसार सरकारी क्वार्टर में रहने वाले परिवारों का सर्वे हो रहा है, जो 15 दिन चलेगा। इसमें ऐसे लोगों की पहचान की जा रहा है जो योग्य और जिन्होंने क्वार्टर को किराये पर दिया। ऐसे लोगों की पहचान कर क्वार्टर योग्य लोगों को दिया जाएगा।
कश्मीर में सिर्फ 1022 लोगों के पास क्वार्टर
कश्मीर घाटी में पीएम पैकेज के तहत नियुक्ति कर्मचारियों में सिर्फ 1022 लोगों के पास ही सरकारी क्वार्टर है। 5 हजार से अधिक कर्मचारी किराये के कमरे में रह रहे हैं। पीएम पैकेज इंप्लाइज के सदस्य सतीश रैना के अनुसार मौजूदा हालात में अब स्थानीय मुस्लिम भी कमरा किराये पर नहीं दे रहे हैं। सरकार के पास हमारे लिए घाटी में आवासीय सुविधा नहीं है।
कश्मीर में पीएम पैकेज के कर्मचारियों के लिए क्वार्टर बनाए जा रहे हैं। कर्मचारियों को जल्द इसकी सुविधा मिलेगी। जम्मू में लोगों रहने वाले विस्थापित परिवारों के लिए फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है।
- केके सिद्दा, राहत आयुक्त, जम्मू।