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NIT श्रीनगर में फिर बवाल, पुलिस ने किया लाठीचार्ज

Wed, 06 Apr 2016 10:39 AM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर

सार

  • एनआईटी श्रीनगर में हालात बेकाबू
  • गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने ल‌िया मामले का संज्ञान
  • महबूबा ने राजनाथ को दिया कार्रवाई का आश्वासन
  • छात्रों ने प्रधानमंत्री से लगाई इंसाफ की गुहार
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छात्रों पर लाठीचार्ज करती पुल‌िस - फोटो : NIT छात्रों द्वारा भेजी गई
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विस्तार
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एनआईटी श्रीनगर में मंगलवार को फिर जमकर बवाल हुआ। पुलिस ने बाहरी छात्रों को दौड़ा-दौड़ाकर बुरी तरह पीटा। पुलिस की पिटाई से सौ से ज्यादा छात्र जख्मी बताए जा रहे हैं। घायल छात्रों को एनआईटी मेडिकल यूनिट में रखा गया है। 
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कुछ घायलों ने फोन पर बताया कि उन्हें कैंपस से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है और तरह-तरह से धामकाया जा रहा है। डरे-सहमे और पिटे छात्रों ने सोशल मीडिया का सहारा लेकर गृहमंत्री, मानव संसाधन मंत्री और प्रधानमंत्री तक से मदद की गुहार की है। 

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से बात की है। उन्होंने ट्रवीट किया है कि महबूबा ने उन्हें आश्वस्त किया है कि पूरी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। इस मामले में त्वरित कार्रवाई की जाएगी। 
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  Spoke to J&K CM Mehbooba Mufti ji regarding the situation in NIT Srinagar. She has assured me to look into the issue &take immediate action — Rajnath Singh (@BJPRajnathSingh) April 5, 2016

फैकल्टी स्टाफ पर लगाया धमकाने का आरोप

घायल छात्र - फोटो : NIT छात्रों द्वारा भेजी गई
वहीं डिप्टी सीएम डा. निर्मल सिंह ने डीजीपी तथा संस्था के निदेशक से फोन पर बात कर स्थिति की जानकारी ली। डीजीपी ने छात्रों की सुरक्षा के मद्देनजर बुधवार से एनआईटी में सीआरपीएफ की दो कंपनी लगाने का निर्देश दिया है। 

इससे पहले एनआईटी में पढ़ने वाले अभिभावकों का प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को डिप्टी सीएम से मिलकर छात्रों की सुरक्षा की मांग की। छात्रों का कहना है कि वे कैंपस में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर पुलिस द्वारा छीना गया तिरंगा वापस करने की मांग कर रहे थे। 

सनद रहे कि भारत-वेस्टइंडीज टी-20 सेमीफइनल मैच में भारत की हार के बाद हुए बवाल के बाद एनआईटी बंद कर दिया गया था। एक घायल छात्र ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान किसी ने सूचना दी कि गेट पर कुछ मीडिया वाले आए हैं। जब हम लोग पत्रकारों से मिलने पहुंचे तो वहां मौजूद पुलिस ने उन्हें डंडों से पीटना शुरू कर दिया। 

छात्रों के अनुसार पुलिस की पिटाई से बाहरी राज्यों के 100 से ज्यादा छात्र जख्मी हो गए हैं। सभी घायल कालेज कैंपस में ही हैं। उन्हें बाहर जाने नहीं दिया जा रहा है। आरोप है कि पुलिस ने हास्टल में घुसकर छात्रों को बाहर निकाला और बेरहमी से पीटा। इस दौरान एसपी स्तर के दो अधिकारी भी मौजूद थे। 

एनआईटी में पिछले दो दिनों से छात्र इस मांग पर अड़े हैं कि एनएचआरडी की टीम खुद श्रीनगर आकर स्थिति का जायजा ले। धरने पर बैठे छात्रों में अधिकतर तीसरे सेमेस्टर के छात्र हैं, जिनका यह भी कहना है कि उन्हें यहां अपना भविष्य असुरक्षित लग रहा है। 

पीएम और गृहमंत्री को दी सोशल साइट पर सूचना

अस्पताल में घायल छात्र - फोटो : NIT छात्रों द्वारा भेजी गई
इतना ही नहीं, कुछ छात्रों को यहां के फैकल्टी स्टाफ द्वारा यह कहकर भी धमकाया जा रहा है कि जो छात्र प्रदर्शनों में थे, उन्हें बैकलॉग रखा जाएगा। एक अन्य छात्र के अनुसार उनकी आवाज को कैंपस से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा। न ही मीडिया को अंदर आने दिया जा रहा है। ऐसे में वह अपनी मांग कहां रखें। 

डीआईजी (सेंट्रल कश्मीर) ग़ुलाम हसन भट ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि सुरक्षा का कोई मसला नहीं है। मतभेद छात्रों और एनआईटी प्रबंधन के बीच है। उन्होंने कहा कि आज भी जब छात्र बाहर निकलने लगे तो उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें बाहर नहीं निकलने दिया गया। 

​भट ने दावा किया कि कैंपस में चाहे कश्मीरी छात्र हों या फिर गैर-कश्मीरी, दोनों की पूरी सुरक्षा है। उन्होंने कहा कि जब तक कैंपस में मामला पूरी तरह से ठंडा नहीं होता, तब तक अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। इसमें आर्म्ड पुलिस और सीआरपीएफ शामिल है।
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पीएम और गृहमंत्री को दी सोशल साइट पर सूचना

अपने जख्म द‌िखाता छात्र - फोटो : NIT छात्रों द्वारा भेजी गई
प्रदर्शनकारी छात्र सोशल साइट के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह को लगातार जानकारी भेज रहे थे। इसके अलावा एचआरडी मंत्री स्मृति ईरानी, पीएमओ इंडिया और एचआरडी मंत्रालय के ट्विटर अकाउंट पर भी छात्रों पर हुए कहर की जानकारी फोटो सहित दी गई।

छात्रों का कहना है कि उन्होंने केंद्र सरकार को पल-पल की जानकारी दी है, ताकि उनकी ओर से तत्काल आवश्यक कदम उठाए जा सकें। 


एमएचआरडी को भेजा मांगपत्र
1. मुख्य द्वार पर राष्ट्रीय ध्वज लगाया जाना चाहिए।
2. छात्रों को पत्थरबाजों से बचने के लिए स्थायी सुरक्षा प्रदान की जाए।
3. एनआईटी में होने वाली परीक्षा, कार्यक्रम और अन्य गतिविधियों में एकरूपता और पारदर्शिता बरती जाए। फैकल्टी की ओर से छात्रों को परेशान न किया जाए। राष्ट्र विरोधी गतिविधियों और हिंसा में शामिल फैकल्टी और प्रशासनिक सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इन्होेंने छात्रों को धमकियां भी दीं हैं।
4. सुरक्षा प्रदान करने में असफल रहने वाली जेएंडके पुलिस को कैंपस से बाहर किया जाए और सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय बल को सौंपी जाए।
5. फर्जी रिपोर्ट और खबर मीडिया को प्रसारित की गई। मीडिया को वस्तुस्थिति से अवगत करवाया जाए। 
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