कट्टरपंथी अलगाववादी मसर्रत आलम को बडगाम के मुख्य दंडाधिकारी ने जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। बडगाम के मुख्य दंडाधिकारी मसर्रत रुही ने अपनी टिप्पणी में कहा कि किसी को भी कानून से अतिरिक्त हिरासत में नहीं रखा जा सकता।
अबु गरेब और ग्वांटेनामो जेलों जैसी स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती। उल्लेखनीय है कि अमेरिका अफगानी तालिबानियों को अबु गरेब और ग्वांटेनामो की जेलों में रखा हुआ है।
मसर्रत की जमानत की अर्जी को मंजूर करते हुए कहा कि यदि मसर्रत आलम राष्ट्रविरोधी है और समाज के लिए घातक है, तो सरकार को चाहिए कि वह कानून के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई करे। संविधान के तहत किसी को भी अपने पक्ष व न्याय पाने का हक है। कोर्ट ने पाया कि पुलिस रिपोर्ट के अनुसार मसर्रत के खिलाफ 27 केस हैं।
अब उसकी उम्र 45 साल हो गई है। 12 केसों में ही जोनल पुलिस हेडक्वार्टर में जांच लंबित है। यदि 27 केसों में प्रत्येक केस को चार्जशीट फाइल करने के लिए 90 दिन दिए जाएं, तो उसे छह साल 7 महीने तक ही जेल में ही रहना पड़ेगा। 15 केसों में विशेष जांच टीम का गठन किया गया है।
प्रत्येक केस की चार्ज शीट फाइल करने के लिए 90 दिन का अधिकतम वक्त दिया जाता है। ऐसे में जिस केस में मसर्रत को पकड़ा गया है। उसे अतिरिक्त हिरासत में नहीं रखा जा सकता। गौरतलब है कि पिछले साल अप्रैल में मसर्रत आलम को पकड़ा गया। सैयद अली शाह गिलानी के दिल्ली से लौटने पर स्वागत कार्यक्रम में उसने पाकिस्तानी झंडे लहराए थे।