कश्मीर में आतंकी जाकिर मूसा के खात्मे से आतंकवाद पर तगड़ी चोट हुई है। आतंकी और आतंकी संगठनों की कमर टूट गई है। आलम यह है कि कश्मीर में आतंकी और आतंकी संगठन अब अलग-थलग पड़ गए हैं। एक तरफ नोटबंदी और टेरर फंडिंग पर लगाम से पहले ही आतंकी संगठन पैसों की तंगी से जूझ रहे थे, दूसरी तरफ आतंकियों के पास हथियारों का टोटा है।
अब आतंकी जाकिर मूसा के मारे जाने से कश्मीर में आतंकियों के सिर पर हाथ रखने वाला भी एक आका कम हो गया। माना जा रहा है कि जाकिर मूसा के मारे जाने के बाद कश्मीर में आतंकियों के हौसले बहुत हद तक पस्त हो गए हैं।
सूत्रों का कहना है कि कश्मीर में अब भी 300 के करीब आतंकी सक्रिय हैं। इनमें सबसे ज्यादा हिजबुल मुजाहिदीन के 250 हैं। इसके बाद नंबर लश्कर-ए-तैयबा का है, जिसके करीब 30 आतंकी सक्रिय हैं। सबसे कम जैश-ए-मोहम्मद के 20 आतंकी हैं। इन तीनों ही आतंकी संगठनों के पास कश्मीर में आतंकी गतिविधियां चलाने के लिए पैसों की जबरदस्त किल्लत चल रही है।
सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कश्मीर में एटीएम और बैंक लूट की घटनाएं बढ़ सकती हैं। आतंकियों के पास हथियारों की भी कमी है। संभव है कि कश्मीर में हथियारों की लूट की घटनाएं भी बढ़ जाएं।
कश्मीर में सबसे अधिक सक्रियता से हिजबुल मुजाहिदीन काम करता है, जिसके सभी बड़े आतंकी सरगना मारे जा चुके हैं। सिर्फ एक रियाज नायकू बचा है। दूसरी तरफ जैश-ए-मोहम्मद का नेटवर्क भी लगभग ध्वस्त हो चुका है। हिजबुल, जैश और लश्कर के प्रमुख आतंकी कमांडर मारे जा चुके हैं। ऐसे में कश्मीर में आतंकियों को आदेश देने वाले भी नहीं बचे हैं। कुल मिलाकर कश्मीर में आतंकी अपने बचे-खुचे दिन निकाल रहे हैं।