संभाग के सबसे बड़े अस्पताल जीएमसी में बायो मेडिकल बेस्ट नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। अस्पताल के महत्वपूर्ण आईसीयू, सीसीयू, इमरजेंसी सहित अन्य जनरल वार्डों में बिना बायो डिग्रेडेवल प्लास्टिक के डस्टबीन रखे गए हैं। खुले में रखे गए डस्टबिन से संक्रमण फैलने के साथ दुर्गंध का आलम है। अस्पताल से निकलने वाली जनरल और इन्फेक्शन बेस्ट को बड़े लिफाफों के बजाय सीधे ही डस्टबिन से उठाया जा रहा है।
चिकित्सा शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग में पहले ही पुराने ढर्रे पर बायो मेडिकल बेस्ट को खत्म करने का काम चल रहा है। उस पर बेस्ट को उठाने के लिए कोई उपयुक्त इंतजाम नहीं हैं। जीएमसी के पंद्रह वार्डों के अलावा अन्य महत्वपूर्ण स्थानों से बायो मेडिकल बेस्ट को उठाने के लिए डस्टबिन लगाए गए हैं।
इनमें जनरल बेस्ट के लिए काले, इन्फेक्शन युक्त बेस्ट के लिए पीले और ब्लेड, सुई या अन्य चीजों की बेस्ट के लिए नीले रंग के बायो डिग्रेडेबल प्लास्टिक को डस्टबिन में डाला जाता है, जिससे बेस्ट को ढककर रखने के साथ उससे फैलने वाले संक्रमण पर नियंत्रण रहता है, लेकिन अस्पताल में तीनों तरह की बेस्ट के लिए डस्टबिन में कोई बड़ा पालीथिन नहीं डाला गया है, जिससे अक्सर डस्टबिन में बेस्ट डालते समय बाहर भी गिर जाती है।
सरकारी अस्पतालों में बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एंड हैंडलिंग रूल्स एक्ट 1998, 2000 के तहत इस बेस्ट को उचित ढंग से खत्म करने और उठाने के प्रावधान है, जिसमें इन्फेक्शन बेस्ट को इंसिलेरेटर में नष्ट किया जाता है, जबकि जनरल बेस्ट को उठाने की जिम्मेदारी नगर निगम की रहती है।
स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग में करीब 6000 बेडों से रोजाना बेस्ट निकल रहा है, जबकि अलग से नए ब्लाक भी शामिल हैं। शहर के अस्पतालों में प्रतिदिन प्रति एक बेड से दो किलो के करीब बायो मेडिकल बेस्ट निकलती है। सरकारी अस्पतालों में से 80 प्रतिशत में जनरल और 15-20 प्रतिशत में इन्फेक्शन बेस्ट शामिल होती है।