हाईकोर्ट का मानना है कि सर्विस बुक में परिलक्षित कुछ प्रविष्टियों के आधार पर वरिष्ठता का दावा नहीं किया जा सकता है। इस दलील के साथ न्यायाधीश राजेश सेखरी ने भारत भूषण कौल की अर्जी को रद्द कर दिया।
उच्च न्यायालय का मानना है कि सर्विस बुक में परिलक्षित कुछ प्रविष्टियों के आधार पर वरिष्ठता का दावा नहीं किया जा सकता है। इस दलील के साथ न्यायाधीश राजेश सेखरी ने भारत भूषण कौल की अर्जी को रद्द कर दिया। भूषण कौल का हालांकि देहांत हो चुका है। लेकिन उनके वकीलों की तरफ से केस लड़ा जा रहा था। इसे लेकर दर्ज याचिका में भूषण कौल की वरिष्ठता तय करने और उसे तमाम लाभ देने की मांग की गई थी।
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इस मामले पर वीरवार को सुनवाई की गई। भूषण कौल 1974 में बतौर जूनियर क्लर्क नियुक्त हुए थे। तब वह एडहाक थे। न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ता 08.11.1974 से अपनी सेवा के नियमितीकरण के किसी भी आदेश को प्रस्तुत करने में विफल रहा है और रिकॉर्ड पर वरिष्ठता सूची के अनुसार याचिकाकर्ता 1.1.1974 से नियमित हो गया है।
सर्विस बुक में दर्शाई गई कुछ प्रविष्टियों के आधार पर ही वरिष्ठता का दावा नहीं किया जा सकता है। उसकी वरिष्ठता के निर्धारण के उद्देश्य से उसकी तदर्थ सेवा की गणना करने का हकदार नहीं पाया जाता है। यह भी कहा कि यह मामला 20 साल से लंबित है। इसमें देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने का निर्देश भी जारी किया। जेएनएफ