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जम्मू बस स्टैंड ग्रेनेड समेत श्रीनगर के दो हमलों की गुत्थी सुलझी

Wed, 24 Jul 2019 02:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
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आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के तीन आतंकियों को गिरफ्तार करने में पुलिस को सफलता मिली है। यह तीनों आतंकी हाल में संगठन में भर्ती हुए थे। इन्होंने जम्मू बस स्टैंड में ग्रेनेड हमला करने के साथ ही श्रीनगर में दो घटनाओं को अंजाम दिया है। इनसे एक ग्रेनेड, 15 एके 47 की गोलियां, दो पिस्टल की गोलियां, एक अंसार गजावत उल हिंद का झंडा बरामद किया गया है। 

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एसएसपी श्रीनगर डॉ हसीब मुगल ने बताया कि आतंकियों की शिनाख्त आसिफ  इकबाल डार, रशीद लतीफ  मीर और शाहिद हसन डार के तौर पर हुई है जिन्हें श्रीनगर के सोवरा और बरजुल्ला इलाके से गिरफ्तार किया गया। आसिफ  को पुलिस काफी दिन से फॉलो कर रही थी। वह काफी जिहादी सामग्री इंटरनेट पर देखता था और बाकी जगहों पर शेयर करता था। 

फॉलो करने के दौरान एक दिन पता चला कि वह घर से गायब हो गया है और पुलवामा पहुंच गया है। उसके माता-पिता ने पुलिस स्टेशन सोवरा में रिपोर्ट दर्ज कारवाई। जब उसे ट्रैक किया गया तो वह दूसरे दिन घर लौट आया। आसिफ  से जब एसपी हजरतबल द्वारा पूछताछ की गई तो काफी चौंका देने वाली चीजें सामने आई। 
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एसएसपी के अनुसार ऐसे युवाओं को पहले सब्जबाग दिखाए जाते हैं लेकिन इनके माता पिता की मेहनत और स्थानीय पुलिस की समय पर की गई कार्रवाई के चलते यह वापस आ पाए नहीं तो यह आतंकवाद में शामिल हो गए होते। एसएसपी के अनुसार इस कामयाबी के पीछे एसपी साउथ सिटी डॉ जीवी संदीप चक्रवर्ती. एसपी हजरतबल सुधांशु वमा, एसडीपीओ सदर शब्बीर खान थे। 

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आतंकी बनने के मॉडस आपरेंडी की मिली जानकारी

एसएसपी के अनुसार पूछताछ में आतंकी बनने के मॉडस आपरेंडी का पता चला। यह पता चला कि असल में युवा कैसे कट्टर बनता है, कैसे आतंकी संगठन में शामिल होता है, कैसे विभिन्न मैसेंजरों के जरिये यह संपर्क में आते हैं, कैसे लोकेशन दी जाती है और फाइनल कांटैक्ट पुलवामा में कैसे होता है। हालांकि, इन सब बातों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है, लेकिन आजकल आतंकी आपस में संपर्क साधने के लिए मैसेंजरों का काफी इस्तेमाल कर रहे हैं। 

आतंकी बनने के लिए देना होता है परीक्षा
एसएसपी ने यह भी बताया कि पूछताछ में यह बात भी सामने आई कि आतंकी बनने से पहले इन्हें कुछ परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है। इन्हें टेस्ट किया जाता है। पकड़े गए तीन युवाओं ने भी अपने आपको साबित करने के लिए टेस्ट दिए। सबसे पहले इन्हें जम्मू भेजा गया। उन्हें एक ग्रेनेड दिया गया और जम्मू में दिसंबर 2018 में इन्होंने बस स्टैंड में ग्रेनेड हमला किया। यह इनका पहला टेस्ट था। 

दूसरे टेस्ट में इन्होंने दो महीने पहले श्रीनगर के बरजुल्ला में रोमान नामक एक एसपीओ को गोली मारी थी। इन्हें यह निर्देश थे कि केवल घायल करना है, गोली से एसपीओ मरना नहीं चाहिए। आतंकियों ने यह भी खुलासा किया कि इन्होंने बरजुल्ला में सीआरपीएफ  गाड़ी पर भी ग्रेनेड दागा था, लेकिन वह फटा नहीं। 

तीनों को अलग-अलग काम दिए गए थे
एसएसपी ने बताया कि यह तीनों युवा अलग-अलग काम को अंजाम देते थे। एक रेकी करता था, एक टारगेट देखता था और तीसरा घटना अंजाम देता था। इनका सरगना आसिफ  है। 

अलगाववादी नेता अशरफ सहराई के आतंकी बने बेटे जुनैद सहराई के निर्देशों पर इन्होंने इन सब घटनाओं को अंजाम दिया था। इनको ग्राउंड इंटेलिजेंस लेने के लिए और छोटी मोटी घटनाओं को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल में लाया जा रहा था। शायद अब इन्हें कोई बड़ा काम सौंपा जाता।
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