श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते पूर्व सीएम उमर
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नेशनल कान्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने वीरवार को कहा कि यदि सरकार के घाटी में सामान्य स्थिति होने के दावे सही हैं तो ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में शब ए कद्र और जुमा उल विदा की नमाज पर रोक क्यों है। उमर अब्दुल्ला ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, एक तरफ सरकार का दावा है कि स्थिति सामान्य है और दूसरी तरफ ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में जुमा उल विदा और शब ए कद्र की नमाज पर रोक लगा दी गई है।
पर्यटकों के आगमन को सामान्य स्थिति से जोड़ने से काम नहीं चलेगा
इस दौरान उनके साथ नेकां के महासचिव अली मोहम्मद सागर, नेकां के प्रांतीय अध्यक्ष नासिर असलम वानी और नेकां नेता तनवीर सादिक थे। उन्होंने कहा कि पर्यटकों के आगमन को सामान्य स्थिति से जोड़ने से काम नहीं चलेगा। पर्यटन को सामान्य स्थिति से नहीं जोड़ा जा सकता है। यह एक कृत्रिम सामान्य स्थिति है जिसे सरकार द्वारा ही चित्रित किया जा रहा है। तथ्य यह है कि स्थिति सामान्य से बहुत दूर है। सरकार अपने शब्दों से नहीं बल्कि अपनी कार्रवाई से यह साबित कर रही है कि स्थिति सामान्य से बहुत दूर है।
सहरी और इफ्तार के समय में बिजली कटौती जानबूझकर किया गया प्रयास
उमर ने कहा कि सहरी और इफ्तार के समय में बिजली कटौती या तो सरकार द्वारा एक जानबूझकर किया गया प्रयास है या सिर्फ इसकी अक्षमता है और यह सरकार ही है जो समझा सकती है कि वह क्या है। उन्होंने कहा कि जम्मू क्षेत्र में भी बिजली संकट चरम पर है। उमर ने कहा, अप्रैल के दौरान हमारी अपनी बिजली परियोजनाओं से उत्पादन चरम पर होता है लेकिन फिर भी हमारे पास सहरी और इफ्तार के समय बिजली नहीं होती है। हमें नहीं पता कि सरकार को बिजली की व्यवस्था कहां से करनी है, लेकिन रमजान के पवित्र महीने को देखते हुए यह बिजली कटौती तुरंत बंद होनी चाहिए।
पिछली हुकूमतें रमजान के पवित्र महीने में देती थी सभी सुविधाएं
उन्होंने यह भी कहा कि पिछली हुकूमतें रमजान के पवित्र महीने में खासकर सहरी और इफ्तार के समय बिजली कटौती न हो यह सुनिश्चित करने में सफल रही थीं, लेकिन वर्तमान शासन ऐसा करने में विफल रहा है। उन्होंने कहा कि कश्मीर और जम्मू के लोगों ने इस तरह की बिजली कटौती नहीं देखी है, जैसा कि वर्तमान में देखा जा रहा है, वह भी रमजान के पवित्र महीने में।