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जम्मू-कश्मीर: उमर बोले, कश्मीर के छात्रों को निशाना बनाए जाने पर पीएम चुप क्यों...

Thu, 21 Feb 2019 03:27 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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उमर अब्दुल्ला - फोटो : फाइल
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पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में कश्मीर के छात्रों को निशाना बनाए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप क्यों हैं। इससे यह साबित होता है कि देश के विभिन्न हिस्सों में कश्मीर के लोगों पर हमला करने वाले सत्ताधारी दल के समर्थन का आनंद ले रहे हैं।
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उमर वीरवार को मीडिया को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शुरू में हमने सोचा था कि यह हमलावर कुछ असामाजिक तत्व थे जो सिर्फ  स्थिति से लाभ उठाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन कुछ दिनों से ऐसा साबित होता है कि सत्तारूढ़ पार्टी न केवल अनुमति दे रही थी बल्कि इन तत्वों का समर्थन भी कर रही है। उन्होंने कहा कि हमने उम्मीद की थी कि पीएम ने लाल किले से कश्मीर के लोगों को गले लगाने की बात की थी। 

कम से कम गृह मंत्री ने ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई का वादा किया होता, लेकिन केवल खामोशी मिली। हम समझ नहीं पा रहे कि इन हालातों में हमें जब मरहम लगाने की कोशिश करनी चाहिए तो ऐसा माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के एक हमले का उदाहरण देते हुए कहा कि जब छत्तीसगढ़ में एक घटना में पुलवामा से ज्यादा सीआरपीएफ के जवान मारे जाते हैं उस वक्त छत्तीसगढ़ की इकोनामिक बायकाट की किसी ने बात नहीं की। क्या यहां की मुस्लिम बहुमत के कारण इस राज्य को बार-बार सजा दी जाएगी।
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कांग्रेस की खामोशी पर सवाल करते हुए उमर ने कहा कि अफसोस की बात है कि सबसे बड़ी विरोधी पार्टी की लीडरशिप भी इस पूरे मामले पर खामोश रही। हम उम्मीद कर रहे थे कि हमदर्दी और प्रोत्साहन के दो शब्द कम से कम कांग्रेस से तो सुनें।

उन्होंने कहा कि देश को मौजूदा स्थिति में एक स्टेट्समैन की जरूरत है न कि एक राजनेता की, लेकिन मैं हर जगह राजनेताओं को देखता हूं, स्टेट्समैन को नहीं। उमर ने घाटी में रहने वालों का धन्यवाद करते हुए कहा कि हम उन लोगों के आभारी हैं जिन्होंने इस घड़ी में कश्मीरी के लोगों का साथ दिया, चाहे वह पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह हों या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हों। उन्होंने हमलावरों के खिलाफ  कार्रवाई की, उन्हें छुपाया नहीं गया।

उमर ने कहा कि मैं राज्यपाल से गुजारिश करता हूं कि जिन बच्चों को अपनी शिक्षा छोड़ वापस आना पड़ा है, उनका ख्याल रखा जाना चाहिए। जब तक हम उस तरह के हालात तैयार न कर सकें जिनमें हम इन बच्चों को वापस जाने पर तयार कर सकें  चाहे वह हमारे कालेजों में चाहे वह हमारी यूनिवर्सिटी में, इन बच्चों की शिक्षा जाया नहीं होनी चाहिए।
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