नेकां उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नेशनल कांफ्रेंस को इख्वानों की पार्टी कहने वालों पर करारा हमला किया है। कहा कि यदि 1996 में नेकां चुनाव में हिस्सा नहीं लेती तो रियासत का मुख्यमंत्री कूका परे होता। इख्वानों को रोकने में यदि किसी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है तो वह नेशनल कांफ्रेंस और फारूक अब्दुल्ला हैं।
सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती व पीडीपी पर जमकर निशाना साधा। कहा कि पीडीपी ने सत्ता में आकर युवाओं को मरवाया और युवाओं को गिरफ्तार करवाया। सत्ता में जब महबूबा थीं तो क्यों नहीं माफी मांगा। वर्ष 2010 में हालात खराब होने के लिए उन्होंने माफी मांगी थी। अगर महबूबा सत्ता में रह कर जनता से माफी मांगती तो वह मानते, लेकिन भाजपा को खुश करने के लिए उन्होंने ऐसा नहीं किया।
भाजपा के साथ उन्होंने अपनी जमात को बचाए रखने के लिए समझौता किया। पावर प्रोजेक्ट वापस लाने की बात कही थी, पाकिस्तान के साथ बातचीत की बात थी, लेकिन यह सब कुछ नहीं हो पाया। अब सत्ता जाने के बाद न तो जमात रही और न ही पार्टी। आए दिन कोई न कोई पार्टी छोड़ रहा है। सत्ता की खातिर उन्होंने भाजपा के साथ समझौता किया था। आज क्या भरोसा कि वह फिर भाजपा के साथ समझौता नहीं कर लेंगी क्योंकि सरकार गिरने के बाद भी उन्होंने राज्यसभा के चुनाव में भाजपा का साथ दिया था।
उन्होंने कहा कि भाजपा नहीं चाहती है कि रियासत में चुनाव हों। क्योंकि उसे डर है कि वह जीत नहीं पाएगी। उनके नेता रोजाना दिल्ली का चक्कर काट रहे हैं ताकि चुनाव न होने पाए। नेकां को बहुमत के साथ सरकार बनानी है। इसके लिए कार्यकर्ता लोगों के बीच रहें। उमर ने कहा कि उन्हें समझ में नहीं आता है कि गवर्नर साहब कहते हैं कि आपरेशन ऑल आउट जैसी चीज नहीं है जबकि सेना कहती है आपरेशन ऑल आउट चलाया जा रहा है। यदि नेकां सत्ता में आई तो युवाओं के उत्पीड़न जैसा कोई आपरेशन नहीं चलेगा। इस अवसर पर अली मोहम्मद सागर, अब्दुल मजीद, सकीना इट्टू, बशीर अहमद वीरी भी थे।