जम्मू। जम्मू-कश्मीर में पहली बार सरकार ने सड़क एवं भवन निर्माण विभाग के इंजीनियरों के लिए सड़कों की मरम्मत के मामले में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तय कर दी है। सड़कों की समय से पहले खस्ता हालत होने पर जूनियर इंजीनियर से लेकर चीफ इंजीनियर तक पर गाज गिरेगी।
चीफ इंजीनियरों को अपने क्षेत्राधिकार में पिछले तीन साल में तारकोल डाले जाने वाली सड़कों की पूरी रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इनमें अंतर जिला सड़कें, मुख्य सड़कें, जिला स्तर और ग्रामीण स्तर पर सड़कें शामिल रहेंगी। विभाग के जूनियर इंजीनियर और वर्क सुपरवाइजर सड़कों की हालत पर करीबी नजर रखेंगे। सड़कों की हालत पर उन्हें रिपोर्ट भी तैयार करनी होगी। सड़क खराब पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार को तत्काल मरम्मत के लिए कहा जाएगा। ऐसा न होने पर ठेकेदार के अलावा संबंधित एग्जीक्यूटिव इंजीनियर पर कार्रवाई होगी। प्रत्येक डिवीजन में सुपरवाइजर और जूनियर इंजीनियर सड़क के खराब होने के लिए जिम्मेदार होंगे। सुपरवाइजर और जूनियर इंजीनियर प्रत्येक सब डिवीजन की सड़कों के वर्तमान दर्जे की रिपोर्ट प्रत्येक महीने की 25 तारीख तक संबंधित एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों को देंगे। ऐसा न होने पर इन पर कार्रवाई की जाएगी।
सड़क एवं भवन निर्माण विभाग के प्रधान सचिव शैलेंद्र कुमार के अनुसार एग्जीक्यूटिव इंजीनियर सड़कों की खराबी के मुताबिक प्राथमिकता सूची तैयार करेंगे, ताकि उनकी मरम्मत इसी आधार पर हो और मंजूरी के लिए योजना को अपने उच्च अधिकारियों के पास भेजेंगे। इसके बाद संबंधित जगह पर तत्काल सड़क की मरम्मत करवाई जाएगी। विभागीय इंजीनियरों को सर्कुलर में जारी दिशा निर्देशों पर तत्काल अमल करने के आदेश जारी किए गए हैं।