...और झल्ला उठा मयंक। कहने लगा- तुम सब पागल हो गए हो। मैं कैसे मान लूं कि मम्मी-पापा, दादा, नानी और मामा की मौत हो गई। अगर यह सच है तो मुझे भी मारकर जला डालो। जाओ मैं नहीं मानता...।
दर्दनाक सड़क हादसे में मारे गए केएएस अधिकारी कल्याण सिंह के इकलौते बेटे की ये बातें सुनकर मनहूस मौके पर मौजूद सारे रिश्तेदार, दोस्त और ग्रामीण ठिठक गए। सबको जैसे सांप सूंघ गया।
फिर किसी की हिम्मत नहीं पटी कि उसे मुखाग्नि देने के लिए तैयार करे। यहां तक कि सोलह साल का सलोना मयंक माता-पिता और दादा जी के अंतिम संस्कार में गया भी नहीं।
जहां एक ही परिवार से तीन अर्थियां एक साथ निकले वहां के हालात क्या हो सकते हैं, इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। जिस बेटे के सिर से मां-बाप का साया उठ गया। दादा का प्यार छिन गया, उसकी हालत भला सामान्य कैसे रह सकती है।