इस पर सदन में मौजूद उमर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि मैं सीएम के जवाब के बीच में नहीं उठता अगर मेरा नाम नहीं लिया गया होता। उन्होंने कहा कि मुझे लाशों पर सियासत करनी नहीं आती। सीएम लाशों पर सियासत करती हैं।
उमर ने कहा कि उन्होंने सुसाइड और बंकर की बात किसी अन्य संदर्भ में कही थी। फिर उमर ने इस घटना के बारे में सदन को विस्तार से जानकारी दी। हालांकि, मुख्यमंत्री ने इस जवाब पर कोई प्रतिरोध नहीं किया।
उन्होंने उमर का नाम लिए बगैर सिर्फ इतना कहा कि पता नहीं सच्चाई से क्यों भागते हैं। कभी एक बात फिर कभी दूसरी बात। इसके बाद उन्होंने शोपियां प्रकरण को लेकर सदन को सरकार की तरफ से की गई कार्रवाई की जानकारी दी।
इस किस्से से ये जरूर जाहिर हो गया कि पत्थरबाजी केवल सेना तथा सुरक्षा बलों के खिलाफ कथित नाराजगी का ही नतीजा नहीं है, बल्कि युवाओं को छोटी-छोटी बातों पर अलगावदी गुमराह कर सुरक्षा बलों पर पत्थर बरसवाते हैं।