पीडीपी ने भी बीफ बैन का विरोध किया है। पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के राजनीतिक सलाहकार पीर मंसूर ने मंगलवार को कहा कि कोई भी धार्मिक आजादी को दबा नहीं सकता। यदि धर्म में कुछ हलाल (अनुमति) है तो उस पर प्रतिबंध क्यों?
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने ताजा फैसले में कहा है कि मीट पर बैन किसी पर जबरन लादा नहीं जा सकता। पूरे विश्व में भारत की पहचान लोकतांत्रिक देश के रूप में है तथा नागरिकों को अपनी धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने का पूरा अधिकार है।
उत्तर प्रदेश में भी प्रतिबंध नहीं है तो फिर यहां क्यों? जनता को पूरा अधिकार है कि वे अपने धर्म के अनुसार कुछ भी खाएं। यहां तक कि मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद तथा पार्टी अध्यक्ष को भी यदि पसंद हो और उनका स्वास्थ्य अनुमति दे तो बीफ खा सकते हैं।
लेकिन धर्म में अनुमति के बाद भी वे क्यों नहीं नहीं खाते हैं? उन्होंने कहा कि पीडीपी कुछ सिद्धांतों के आधार पर बनी है और उससे किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।
पीडीपी ने भाजपा के साथ न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तहत सरकार बनाया है और इसका यह मतलब कतई नहीं है कि दोनों पार्टनर ने सिद्धांतों तथा विचारों को समाहित कर लिया है।
पार्टी अपने विचारधारा तथा सिद्धांतों से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। हालांकि, भाजपा ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के आदेशों का सम्मान करेगी।