एनीमिया से पीडि़त बच्चों के उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग ने शिक्षा विभाग के साथ मिलकर नई योजना तैयार की है, जिसके तहत अब सरकारी स्कूलों में हर रोज विद्यार्थियों को मिड-डे-मील के साथ एक आयरन की गोली खिलाई जाएगी। स्कूलों के साथ आंगनबाड़ी सेंटर में भी बच्चों को आयरन की गोली दी जाएगी।
करीब चार वर्ष पहले स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिए स्कूल हेल्थ चेकअप प्रोग्राम शुरू किया गया था, जिसके तहत डाक्टर सरकारी स्कूल में जांच शिविर का आयोजन करके बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करते हैं। चार वर्ष के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने पाया कि प्रत्येक वर्ष चार हजार से ज्यादा एनीमिया से पीडि़त पाए गए हैं, जिसका मुख्य कारण बैंलेंस डाइट न लेना है।
बैलेंस डाइट न लेने पर शरीर में खून की कमी होती है और मरीज इस तरफ ध्यान नहीं देता है। जैसे-जैसे खून घटता जाता है शरीर में कई तरह की बीमारियां लगने लगती हैं। स्वास्थ्य विभाग ने शिक्षा विभाग के साथ मिलकर अब बच्चों को स्वस्थ बनाने की जिम्मेदारी उठाई है।
सरकारी स्कूल में पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को मिड-डे-मील के रूप में डाइट दी जाती है। अब विद्यार्थियों को हर रोज डाइट के साथ एक आयरन की गोली भी मिलेगी। इससे धीरे-धीरे बच्चों के शरीर में खून की कमी दूर हो जाएगी और बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ होकर आगे बढ़ सकेगा।
स्कूलों के अलावा प्रत्येक आंगनबाड़ी सेंटर भी आयरन की गोलियां दी जाएगी। आयरन की गालियों के अलावा छह महीने में एक बार बच्चे को पेट के कीटे मारने की दवा भी खिलाई जाएगी।
सीएमओ डॉ. अरुण शर्मा ने बताया कि शिक्षा विभाग को आयरन की गोलियां दे दी गई हैं, जबकि आंगनबाड़ी सेंटर के लिए आईसीडीएस के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को गोलियां देना बाकी हैं। उन्होंने कहा कि आयरन की गोलियां खाने पर बच्चों को काफी लाभ होगा और उनका मन भी पढ़ाई में लगेगा।