अलगाववादी नेता मशरत आलम से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने प्रेस काउंसिल आफ इंडिया को नोटिस जारी किया है। याचिका में वकील ने दलील दी कि मीडिया ने बेवजह एक अज्ञात शख्स को अलगाववादी नेता बना दिया।
घाटी के एक कोने में सौ लोगों के हुजूम ने राष्ट्र विरोधी और पाकिस्तान समर्थक नारे लगाए और पाकिस्तान के झंडे लहराए। मीडिया ने उसे इस तरह पेश किया, जैसे वह बहुत बड़ा अलगाववादी नेता हो। महात्मा गांधी, भगत सिंह और अन्य का इतिहास बताने के बजाए मीडिया ने आलम की जीवनी पर लिख डाला।
जैसे वह देश का स्वतंत्रता सेनानी या अदाकार हो। प्रेस काउंसिल को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस तरह की खबरें भविष्य में प्रकाशित न हों। हाईकोर्ट के जस्टिस धीरज कुमार ठाकुर और जस्टिस जनकराज कोतवाल ने प्रेस काउंसिल को नोटिस जारी कर उठाए गए कदम की छह सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा। जेएनएफ