मूसलाधार बारिश और बाढ़ से तीन मौतें झेल चुकी शीतकालीन राजधानी जम्मू अब भी भारी बारिश और बाढ़ जैसे हालात से निपटने के लिए तैयार नहीं है। बुनियादी ढांचे जिसमें बिजली, सड़कों, पीएचई ढांचे, नालों आदि को पहुंची क्षति के बावजूद बरसात से निपटने के लिए विभागों की तैयारी आधी-अधूरी ही है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार बरसात तक सड़कों पर तारकोल डाला जाना संभव नहीं है। इसका मतलब यह है कि लोगों को बारिश का मौसम जारी रहने तक गड्ढों और टूटी सड़कों पर चलने पर ही मजबूर होना पड़ेगा। विभाग ने गड्ढों में मिट्टी डालना तो शुरू की है, लेकिन बारिश और जल भराव से मिट्टी बह जाएगी और फिर सड़कें तालाब बनेगी।
बिजली विभाग के रेलवे रोड स्थिति रिसीविंग स्टेशन में बारिश के बाद ही बार पानी स्टेशन के अंदर घुस जाता है और कई घंटे बिजली सप्लाई ठप हो जाती है, लेकिन स्टेशन के अंदर पानी न घुसे, इसके लिए प्रबंधन पर अभी तक कोई ठोस फैसला नहीं किया गया है।
बिजली बंद होने पर पानी की सप्लाई प्रभावित तो होती ही है। तवी में बाढ़ आने पर सितली फिल्ट्रेशन प्लांट में सिल्ट जम जाने की वजह से पेयजल की सप्लाई प्रभावित होती है। ऐसी समस्या से निपटने के लिए भी विभाग के पास कोई ठोस योजना नहीं है। नालों पर हुए अतिक्रमण और गंदगी को हटाने के लिए ठोस कदम उठाया जाना बाकी है।