संघर्ष विराम के छह दिन पूरे हुए। बिना फटे पड़े गोलों और मोर्टार को हटाने के लिए ऑपरेशन क्लीयरेंस युद्धस्तर पर जारी है। ज्यादातर इलाकों में बंकरों से लोग घर आ चुके हैं। गली-मोहल्लों-सड़कों पर पसरा सन्नाटा भी धीरे-धीरे खत्म होने लगा है। फिर भी हालात ऐसे नहीं, जिसे पूरी तरह से सामान्य कहा जा सके। तनाव और असमंजस कहीं न कहीं बरकरार है।
उड़ी और तंगधार : खुद लौटे पर परिवार को नहीं लाए
भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान जो कुछ हुआ, उससे उड़ी के 10-12 गांव बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। संघर्ष विराम के बावजूद लोगों का तनाव बरकरार है। उनकी गतिविधियों से अंदाजा लगाया जा सकता है।
अखनूर : रोजाना कर रहे बंकरों की सफाई, शाम ढलते ही घर के अंदर
खनूर के सीमावर्ती क्षेत्र गढ़खाल में हालात भले सामान्य हों, पर लोग अब भी पूरी तरह चौकस हैं। सतर्कता बरती जा रही है। लोग रोजाना बंकरों की सफाई करते हैं और शाम ढलने के बाद घरों में ही रहना पसंद करते हैं।
सांबा : भय के चलते जरा सी आहट पर खुल जाती है नींद
सांबा में जीरोलाइन के करीब रहने वाले रात के वक्त पहरेदारी करते हैं। स्थानीय निवासी सोन सिंह कहते हैं, अब तो जरा सी आहट पर नींद खुल जाती हैं।
अरनिया : दहशत ऐसी...बच्चों को स्कूल खुलने पर बुलाएंगे
अरनिया में भी लोग शाम ढलते ही घरों की लाइट बंद कर देते हैं। खासकर छत पर बने कमरों में रहने वाले लोग लाइट जलाने से बचते हैं। बचाव शिविर पूरी तरह से वीरवार की शाम को खाली हुए हैं। रिश्तेदारों के यहां भेजे गए बच्चों को लोग अभी बुलाने से बच रहे हैं।
सुचेतगढ़ : सीमा पार की हर गतिविधि पर चौकस नजर
सुचेतगढ़ सीमा पर सीमा सुरक्षा बल के जवानों की बढ़ी गश्त और सीमा पार की गतिविधियों पर चौकस नजर बराबर बनी हुई है। बासपुर गांव के पूर्व सरपंच मोहिंदर चौधरी कहते हैं कि पहले की तुलना में गश्त बढ़ी है और लगातार जारी है।
पुंछ : बहुत घाव मिले हैं...अब तो आंख झपकाने में भी डर रहे
इस अघोषित युद्ध में सबसे ज्यादा नुकसान पुंछ को उठाना पड़ा है। यहां के लोग कहते हैं, हमें सबसे ज्यादा घाव मिले हैं। अब तो हर समय डर लगता है कि न जाने कब धमाका सुनाई दे जाए।
खोड़-ज्यौड़ियां : शाम होते ही निकलने लगते हैं सीमा से दूर
खोड़-ज्यौड़ियां में रहने वाले यूं तो घर लौट आए हैं, पर शाम ढलते ही सीमा से दूर निकलने की कवायद शुरू हो जाती है। लोगों को लगता है कि न जाने रात के अंधेरे में क्या हो जाए। बुजुर्ग तो अभी लौटना नहीं चाह रहे हैं।