जम्मू जिले में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) स्थापित करने के लिए दी गई 159 हेक्टेयर जमीन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की जांच के दायरे में आ गई है। एक याचिका में इसके वन भूमि होने का दावा किया गया है।
एनजीटी ने इस बारे में केंद्र और राज्य की सरकारों से प्रतिक्रिया मांगी है। एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर सरकार के अलावा अन्य पक्षों से 31 मार्च तक जवाब देने को कहा है।
एनजीटी ने जम्मू के रहने वाले निगम प्रिय सरूप की याचिका पर ये नोटिस दिए हैं। सरूप ने राज्य सरकार के उच्च शिक्षा विभाग को 159 हेक्टेयर जमीन देने के फैसले पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि इससे इलाके के पर्यावरण और पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचेगा।
कानून के विद्यार्थी सरूप ने कहा है कि आईआईटी स्थापना के लिए वन भूमि के हस्तांतरण को उचित नहीं माना जा सकता, जबकि जम्मू और अन्य जिलों जैसे रजौरी, उधमपुर और सांबा में काफी जमीन खाली पड़ी है। सरूप ने दावा किया है कि इस हस्तांतरण से पारिस्थितिकी के लिहाज से संवेदनशील रामनगर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी पर नकारात्मक असर पड़ेगा।