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कटड़ा हादसा: 5 दिन पहले ही हुआ था अर्जुन और वंदना का विवाह

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पिछले कई दिनों से घो मन्हासा स्थित अर्जुन सिंह चिब के निवास पर उत्सव का माहौल था। 18 नवंबर को अर्जुन और वंदना का विवाह हुआ था। तब से लगातार घर में मेहमानों का तांता लगा हुआ था।
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सोमवार की सुबह नव दंपति को घर वालों ने बड़े चाव से माता के दर्शन के लिए कटड़ा रवाना किया था। लेकिन ईश्वर को कुछ और मंजूर था। दोपहर लगभग दो बजे हैलीकाप्टर दुर्घटना का समाचार मिलने पर घर वालों पर आसमान टूट पड़ा।

उन्हें क्या पता था कि उनकी खुशियां चंद दिनों के लिए हैं। घर में अभी भी बिजली की झालरें लगी हैं। बरामदे में फूल लगे हुए थे। सुबह तक जो बरामदा खुशियों से भरा था, वह दोपहर बाद परिवार के लोगों के रुदन में डूब चुका था।
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घो मनासा के वार्ड तीन स्थित रानी निवास में लोगों का तांता लगा हुआ था। सूचना पाकर पहुंचे अर्जुन के ससुराल वालों का बुरा हाल था। वंदना की बड़ी बहन वार्ड तीन स्थित बहन के ससुराल पहुंचते ही दरवाजे पर होश खो बैठी। परिवार के लोगों ने उन्हें उठाकर घर के अंदर पहुंचाया।
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आर्मी में अफसर बनने की तैयारी थी अर्जुन की

सीआरपीएफ में सब इंस्पेक्टर के रूप में तैनात पिता राजेश सिंह चिब का इकलौता बेटा अर्जुन बचपन से ही प्रतिभाशाली था। छोटी उम्र में ही उसने वायुसेना में कारपोरल पद पर ज्वाइन किया। पांच साल से वह बरेली में तैनात था।

घर वालों की पसंद पर सीमावर्ती गांव कोठे की वंदना से 18 नवंबर को उसने विवाह किया। रिश्तेदारों ने बताया कि विवाह के बाद उसने माता वैष्णो देवी के दर्शन करने की इच्छा जताई थी। मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की सुरक्षा टीम में तैनात चाचा सुरेश चिब ने हैलीकाप्टर के टिकट बुक कराए।

अर्जुन ने पुरखू में रहने वाले अपनी बुआ के बेटे महेश्वर उर्फ गौरव को भी अपने साथ ले लिया। सुबह लगभग आठ बजे वह कार से कटड़ा रवाना हुए थे। घर वालों की उम्मीद थी कि देर शाम माता के दर्शन कर लौट आएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

अर्जुन ने हालांकि छोटी उम्र में ही वायुसेना में कारपोरल की नौकरी हासिल की, लेकिन उसका सपना उच्च सैन्य अफसर बनना था। वायुसेना से जुड़ने के बाद भी अर्जुन इंडियन आर्मी में अफसर बनने की तैयारी में जुट गया। उसने लेफ्टिनेंट की लिखित परीक्षा पास कर ली थी। वह बेसब्री से इंटरव्यू का इंतजार कर रहा था। ताकि वायुसेना छोड़ आर्मी में अफसर बन सके।
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