राज्य में खनन के मामले में स्थानीय निवासी अंकुर शर्मा ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। रावी दरिया में तय नियमों से अधिक खनन और इससे लोगों को पेश आ रही समस्याओं का हवाला देकर मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भी पत्र की कॉपी भेजी गई है। वहीं माइनिंग विभाग के अधिकारियों ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया है।
उन्होंने कहा कि रावी दरिया में खनन तय नियमों और राज्य सरकार द्वारा टेंडर अलाटमेंट की कार्रवाई को पूरा करने के बाद ही किया जा रहा है। रोशनी भूमि घोटाले और स्टेट लैंड पर अवैध कब्जों के खिलाफ कोर्ट में पहले से जनहित याचिका दाखिल कर चुके अंकुर ने बताया कि रावी दरिया में खनन सभी नियमों और न्यायालय के आदेशों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। उन्होंने खनन माफिया और राज्य सरकार के अधिकारियों के बीच संबंधों का हवाला भी इस पत्र में दिया।
उन्होंने कहा कि इससे राज्य के पर्यावरण पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि रावी दरिया में न सिर्फ माइनिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है बल्कि अवैध स्टोन क्रशरों पर कार्रवाई से भी प्रशासन हाथ खींच रहा है। जिला उपायुक्तों से लेकर मजिस्ट्रेट तक गुहार लगा चुके लोगों के हक में प्रशासन द्वारा कार्रवाई न करने को भी उन्होंने चिंताजनक बताया। अंकुर ने सरकार से इस संदर्भ में उचित कदम उठाकर लोगों को राहत देने की मांग की है।
वहीं, जियोलॉजी और माइनिंग विभाग के जिला अधिकारी बोधराज ने बताया कि रावी दरिया में खनन तय नियमों और सरकार द्वारा टेंडरिंग की प्रक्रिया को पूरा करने के बाद किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले साल आई बाढ़ में न सिर्फ नदी नालों और दरिया में सही तरीके से सिल्टिंग हुई है, बल्कि सरकार को इससे इस साल की पहली तिमाही में ही चार करोड़ से अधिक का राजस्व भी हासिल हुआ है। उन्होंने कहा कि रावी में खनन पर विभाग समय-समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करता है और उल्लंघन करने वालों को बाकायदा जुर्माना किया जाता है।