पारा चालीस के करीब पहुंचने के साथ ही बिजली और पेयजल की बढ़ी मांग को पूरा करने संबंधित विभागों के लिए मुश्किल पड़ने लगी है। मांग और उपलब्धता में पहले ही चल रहे अंतर से अघोषित कटौती बढ़ गई है और लोगों में हाहाकार मचने लगा है। आने वाले दिनों में हालात और खराब हो सकते हैं।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रियासत में बिजली की मांग और उपलब्धता में पहले ही एक हजार मेगावाट से ज्यादा का अंतर चला आ रहा है। मौजूदा समय में बिजली की मांग 2600 मेगावाट के भी पार पहुंच चुकी है, जबकि उपलब्धता 1500 से 1600 मेगावाट के बीच ही है।
इसी तरह जम्मू शहर में पेयजल की मांग बढ़कर 46 मिलियन गैलन डेली तक पहुंच चुकी है, जबकि उपलब्धता 42.5 मिलियन गैलन प्रतिदिन ही है। इसके अलावा पानी की आपूर्ति का पूरा सिस्टम बिजली पर निर्भर करता है। बिजली की सप्लाई सुचारु रहे तो ही पीएचई विभाग पंपिंग के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति कर पाने में सक्षम है।
बिजली कटौती बढ़ने से पेयजल आपूर्ति पर भी असर पड़ने लगा है। बिना इलेक्ट्रानिक मीटर लगे इलाकों में रोजाना आठ घंटे की शेड्यूल कटौती हो रही है, जबकि इलेक्ट्रानिक मीटर लगे इलाकों में शेड्यूल कटौती का तो कोई प्रावधान नहीं रखा गया है, लेकिन जरूरत के हिसाब से दो से पांच घंटे तक कटौती हो रही है।
आने वाले दिनों में कटौती और बढ़ेगी। बिजली विभाग की ईएमएंडआरई डिवीजन जम्मू के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर सुनील कुमार का कहना है कि ओवरलोड बढ़ने पर जरूरत के अनुसार अघोषित कटौती करनी पड़ती है।