एक अहम फैसले में सोमवार को रियासती सरकार ने 19 अप्रैल 2015 को कैबिनेट की ओर से मंजूर नई भर्ती नीति में बदलाव का फैसला लिया। उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट सब कमेटी की बैठक में यह फैसला लिया गया।
राज्यपाल एनएन वोहरा द्वारा भर्ती नीति की पुनर्समीक्षा के लिए लौटाए जाने और नीति के जन विरोध को देखते हुए यह फैसला लिया गया। सब कमेटी की ओर से विधि सचिव मोहम्मद अशरफ मीर और सामान्य प्रशासनिक विभाग (जीएडी) के सचिव गजनफर अहमद को भर्ती नीति में जरूरी बदलाव कर इसकी रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
रिपोर्ट मिलने पर कैबिनेट सब कमेटी की अगली बैठक में भर्ती नीति पर अहम निर्णय लिया जाएगा। श्रीनगर में हुई बैठक में स्वास्थ्य मंत्री चौधरी लाल सिंह, पीएचई मंत्री सुखनंदन कुमार, शिक्षा मंत्री नईम अख्तर, संसदीय मामलों के मंत्री बशारत बुखारी और वित्त मंत्री हसीब द्राबू शामिल रहे। दो घंटे से अधिक चली बैठक में नई भर्ती नीति पर मंथन हुआ।
खास तौर से भर्ती नीति में नई सरकारी नौकरियों में सात साल तक कांट्रैक्चुअल (ठेके) के प्रावधान पर सहमती न बनने पर आखिर में नई भर्ती नीति में संशोधन का निर्णय लिया गया। साथ ही कैबिनेट सब कमेटी के समक्ष पेश नये सिरे से भर्ती नीति का ड्राफ्ट पेश करने को विधि सचिव मोहम्मद अशरफ मीर और जीएडी सचिव गजनफर अहमद को दिशा निर्देश जारी किए।
नई भर्ती नीति का किन मुद्दों पर हुआ विरोध
नई भर्ती नीति के तहत गजटेड और नान गजटेड पदों के लिए होने वाली नियुक्तियां जिला स्तर पर होनी थीं। सात साल के बाद ही नियुक्त कर्मचारियों को नियमित करने का प्रावधान था। कर्मचारी को नियमित करने का आधार उसके प्रदर्शन पर तय किया गया था।
विपक्षी दलों नेकां और कांग्रेस ने इसका जमकर विरोध किया। साथ ही सड़कों पर शिक्षित बेरोजगार युवा भी उतरे। नई भर्ती नीति को 19 अप्रैल को कैबिनेट मंजूरी मिली थी। 25 अप्रैल को राज्यपाल एन एन वोहरा ने पुनर्समीक्षा के लिए इसे सरकार को लौटा दिया।
पूर्ववर्ती सरकार को भी फैसला लेना पड़ा था वापिस
नेकां-कांग्रेस गठबंधन की पूर्ववर्ती सरकार ने भी पांच साल के कांट्रैक्चुअल आधार पर नौकरियां देने की भर्ती नीति बनाई थी। इस नीति का भी रियासत में जमकर विरोध होने के बाद उसे वापस लेना पड़ा था।