जेयू कैंपस में आयोजित तीन दिवसीय जेके साइंस कांग्रेस के दूसरे दिन रविवार को जनरल जोरावर सिंह सभागार में सेशन के दौरान दो महत्वपूर्ण लेक्चर दिए गए। सेशन के पहले लेक्चर में गवर्नमेंट मेडिकल कालेज के अनाटमी विभाग की एचओडी एवं प्रो. डा. सुनंदा रैना ने बदलते लाइफ स्टाइल और हाई टेक्नोलॉजी से जुड़े उपकरणों के इस्तेमाल करने से होने वाली गंभीर बीमारियों के बारे में अवगत करवाया।
प्रो. रैना ने ‘आर्गन टॉक-टाइम टू टेक प्रीवेंशन’ विषय पर अपना लेक्चर दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में लोग सबसे ज्यादा मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल कई गंभीर बीमारियां उत्पन्न होती हैं। इसके अलावा धूम्रपान करना, शराब पीना और एंटीबायोटिक दवाइयों के सेवन करने से शरीर पर ही बुरा प्रभाव पड़ता है।
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है कि हमें स्वस्थ दिनचर्या को अपनाना चाहिए, तभी हम स्वस्थ रह सकते हैं। सेशन के दूसरे लेक्चर कार्यक्रम के दौरान जेएंडके इस्लामिक यूनिवर्सिटी आफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के उपकुलपति प्रो. एआर तराग ने राज्य और आसपास के राज्यों में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी दी। प्रो. तराग ने पहाड़ी खेती प्रणाली में रेशम उत्पादन के संबंध में लेक्चर दिया।
उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तरांचल जैसे राज्यों में रेशम उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकता है। प्रो. तराग ने मौसम के आधार पर रेशम कीट के पालन पोषण के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रेशम की पैदावार से कई किस्म के सिल्क का उत्पादन किया जा सकता है।
टस्सर सिल्क, आक टस्सर और थेर टस्सर और अन्य किस्म के सिल्क का उत्पादन करने के लिए चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके उत्पादन के लिए जरूरी है कि बेहतर तकनीक और अच्छे मौसम के आधार पर रेशम कीट की पैदावार से अच्छी क्वालिटी के सिल्क का उत्पादन कर किसानों को अधिक लाभ मिले।