जम्मू-कश्मीर में मंत्रिमंडल पुनर्गठन के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) में विधायकों के बगावती सुर तेज हो गए हैं। शुक्रवार को 18 विधायकों ने बैठक कर आगामी रणनीति बनाई। यह बैठक सांसद आगा रुहुल्ला मेहंदी के इस्तीफे से ठीक पहले हुई है। इसे लेकर अब सियासी गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है।
आशंका जताई जा रही है कि सांसद रुहुल्ला के साथ तीन नवंबर को पार्टी के कुछ विधायक भी जा सकते हैं। नेकां सूत्रों के अनुसार, श्रीनगर एयरपोर्ट रोड स्थित पार्टी के एक विधायक के आवास पर शुक्रवार को बैठक हुई। इसमें नेकां के 17 विधायकों के साथ एक निर्दलीय विधायक भी शामिल रहे। बैठक का मुख्य एजेंडा मंत्रिमंडल में हुए विस्तार को अनुचित ठहराते हुए इसके खिलाफ सामूहिक रणनीति तैयार करना था।
असंतोष का दायरा बढ़ने की चिंता
बैठक में बड़ी संख्या में विधायकों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि असंतुष्टों का यह गुट आने वाले दिनों में और बड़ा हो सकता है। शपथ ग्रहण समारोह से दूरी बनाने वाले 11 विधायक पहले से तय व्यस्तताओं के चलते शुक्रवार की बैठक में शामिल नहीं हो सके, लेकिन वे भी नाराज बताए जा रहे हैं।
बैठक में मौजूद सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से यह मांग उठाने का फैसला किया कि 16 अक्तूबर 2024 को सरकार गठन के समय शपथ लेने वाले चारों मंत्रियों को पद से हटाया जाना चाहिए। असंतुष्ट विधायकों का तर्क है कि ये मंत्री अपने कार्यकाल के दो वर्ष पूरे कर चुके हैं।
अब समय आ गया है कि उन्हें हटाकर नए चेहरों को मंत्रिमंडल में काम करने का अवसर दिया जाए। सत्तारूढ़ दल के भीतर विधायकों की इस एकजुटता ने पार्टी हाईकमान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर की सियासत में हलचल और बढ़ने की संभावना है।
हाजी सागर बने रहेंगे महासचिव नेकां अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने वरिष्ठ नेता
हाजी अली मोहम्मद सागर को अगले आदेश तक पार्टी के महासचिव पद पर बरकरार रखने का फैसला किया है। सागर लंबे समय से नेकां के प्रमुख रणनीतिकारों और सांगठनिक स्तंभों में से एक रहे हैं। इसे भी पार्टी में चल रही खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। घटनाक्रम का सबसे खास पहलू यह है कि नेकां ने तीन दिन में ही महासचिव पद पर फैसला बदल दिया।
27 अक्तूबर को कैबिनेट विस्तार के दिन सागर को मंत्री बनाए जाने के बाद उनकी जगह मुबारक गुल को महासचिव बनाया गया था। गुल ने पदभार भी संभाल लिया था। अब 30 अक्तूबर को फारूक के नए आदेश में सागर को अगले आदेश तक महासचिव पद पर बरकरार रखने की बात कही है।
मुबारक गुल जता चुके हैं नाराजगी
कैबिनेट विस्तार में जगह नहीं मिलने पर मुबारक गुल ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जताई थी। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने उन्हें महासचिव नियुक्त किया था। ऐसे में सागर को दोबारा महासचिव पद पर बनाए रखने का आदेश पार्टी के भीतर संगठनात्मक और राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। मुबारक गुल को पहले महासचिव बनाकर मंत्री पद से वंचित रहने की नाराजगी साधने की कोशिश हुई थी। अब सागर की वापसी के बाद गुल की नई भूमिका पर बड़ा सवाल है।
गूल को कैबिनेट में जगह न मिलने से नाराज समर्थकों ने निकाला मशाल जुलूस
नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और ईदगाह के विधायक मुबारक गुल को नई कैबिनेट में शामिल नहीं किए जाने के विरोध में उनके समर्थकों ने शुक्रवार देर रात श्रीनगर के ईदगाह इलाके में मशाल जुलूस निकाला। हाथों में जलती मशालें लेकर सड़कों पर उतरे समर्थकों ने सरकार के फैसले के खिलाफ नारेबाजी की और गुल को मंत्रिमंडल में शामिल करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान समर्थकों ने जस्टिस फॉर ईदगाह और मुबारक साहब कदम बढ़ाओ, हम तुम्हारे साथ हैं... जैसे नारे लगाए। समर्थकों ने कहा, गुल पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं तथा लंबे समय से क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
ऐसे में उन्हें कैबिनेट में जगह नहीं दिया जाना ईदगाह की जनता के जनादेश की अनदेखी है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि ईदगाह के राजनीतिक महत्व और मुबारक गुल के अनुभव को देखते हुए उन्हें मंत्रिमंडल में उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए।
वीडियो में गाड़ियां निकलती दिखाई दे रही हैं। उसमें विधायक थे या नहीं, यह कहना जल्दबाजी होगा। अभी इस समय विधायकों की बैठक को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं है। इसलिए अभी इंतजार इंतजार ही सही रहेगा। इमरान नबी डार, प्रवक्ता नेकां (कश्मीर)
नेकां के विधायकों को तोड़ने का मेरा कोई इरादा नहीं है। पार्टी के भीतर जो कुछ हो रहा है, उसके लिए मैं जिम्मेदार नहीं हूं। तीन नवंबर को इस्तीफा पक्का है और उसमें कोई बदलाव नहीं होगा।-आगा रुहुल्ला मेहदी, सांसद