फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इस बार नवरात्र में हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, लाएंगी सुख-समृद्धि

विज्ञापन
विज्ञापन
जम्मू। शारदीय नवरात्र 26 सितंबर से शुरू हो रहे हैं। इस बार माता दुर्गा हाथी पर सवार हो कर आएंगी। देवी भागवत पुराण के अनुसार हाथी का वाहन ने से सुख-समृद्धि आती है। साथ ही ये वर्षा अधिक होने का भी संकेत होता, जिससे फसलों की पैदावार अच्छी होती है।
विज्ञापन

कलश स्थापना व ज्योति प्रज्ज्वलन के लिए सोमवार को पूरा दिन शुभ होगा। श्री दुर्गाष्टमी तीन अक्तूबर सोमवार को, महानवमी चार अक्तूबर मंगलवार को है, जबकि पांच अक्तूबर बुधवार को विजयदशमी (दशहरा) मनाया जाएगा। महंत रोहित शास्त्री के अनुसार इस महापर्व में मां भगवती के नौ रूपों की पूजा की जाएगी। सोमवार को प्रथम पूजा यानी कलश स्थापना होने पर मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। इस वर्ष 26 सितंबर से शारदीय नवरात्र का आरंभ हो रहा है।
डेढ़ लाख रुपये से सजेगा मां बावे वाली का दरबार
जम्मू। शक्ति की उपासना का महापर्व नवरात्र के दौरान मां बावे वाली के दरबार को भव्य बनाने के लिए प्रबंधन ने श्रृंगार करवाने का फैसला लिया है। इस बार नवरात्र पर मां का दरबार रंग-बिरंगे फूलों से महकेगा। मां के दरबार में गुलाब, गेंदा, गुलदाउदी व अमृतसर से मंगवाई रंग-बिरंगी लाइटों से सजेगा। श्रृंगार पर डेढ़ लाख रुपये खर्च होंगे। नवरात्र के लिए माता के दरबार को भव्य बनाने की तैयारियां जारी हैं। रंग-रोगन का काम शुरू हो गया है। बावे वाली माता मंदिर के पुजारी बिट्टा ने कहा कि मंदिर में फूल और लाइटें लगाने का काम शुक्रवार से शुरू होगा। सोमवार को प्रथम नवरात्र से प्रतिदिन सुबह और शाम विशेष पूजा-अर्चना और आरती होगी। पांचवें नवरात्र के बाद तारा डूबेगा। डुग्गर प्रदेश में तारा डूबने पर शुभ कार्य नहीं किया जाता है। ऐसे में छठे नवरात्र से मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आएगी। नवरात्रि को लेकर बाजारों में चुनरी, नारियल आदि पूजन सामग्री की दुकानें सजने लगी हैं।
विज्ञापन

एक अक्तूबर को डूबेगा तारा, शुभ कार्य नहीं होंगे
इस वर्ष एक अक्तूबर को सुबह 5:5 बजे शुक्र तारा पूर्व में अस्त होगा। वहीं, 25 नवंबर को शाम 5:21 बजे शुक्र तारा पश्चिम में उदय होगा। इस दौरान विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं होंगे। तारा डूबने या चढ़ने का तात्पर्य सूर्य का उदय और अस्त होना जैसा है। भारतीय ज्योतिष में गुरु एवं शुक्र ग्रह को तारा माना गया है। पंचांग के अनुसार 25 नवंबर को तारा उदय होने के बाद विवाह के मुहूर्त दो, चार, सात, आठ, नौ और 14 दिसंबर को हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें