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हालात इंसान को बना देते हैं उसे ‘गिरगिट’

Mon, 06 Apr 2015 05:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
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ऊंचे ओहदे और परिस्थितियां किस तरह इंसान को गिरगिट की तरह रंग बदलने को मजबूर करती हैं, इसे रूसी धारावाहिक ‘गिरगिट’ में दिखाया गया है। नटरंग ने संडे थियेटर संस्करण के तहत एंटन चेखव के रूसी नाटक ‘गिरगिट’ का हिंदी में मंचन किया। नाटक की कहानी के जरिये समाज में राजनीति और सामाजिक ढांचे के ताने-बाने को दर्शाने का प्रयास किया।
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नाटक के जरिये यह दिखाने का प्रयास किया गया कि ऊंची पहुंच हो या छोटे व्यक्ति से संबंधित कोई भी बात, हर परिस्थितियों में लोगों की सोच और व्यवहार के बदलने की प्रक्रिया उस छोटे से जीव गिरगिट से मेल खाने लगती है। नाटक की कहानी एक कुत्ते और भ्रष्ट पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमती हुई दिखाई गई, जिसमें विभिन्न हालातों के दौरान दोनों का स्वरूप बदलने लगता है।

नाटक में दिखाया गया कि एक जेबकतरे को कुत्ता काट लेता है, तो वह पुलिस अधिकारी से उसके मालिक से मुआवजे दिलवाने की मांग करता है, तभी एक राहगीर कहता है कि यह कुत्ता स्थानीय मंत्री का है। स्थानीय मंत्री के कुत्ते की बात सुनते ही पुलिस अधिकारी उस जेबकतरे की मदद करने के बजाय उसे पीटना शुरू कर देता है कि इतने बड़े मंत्री के कुत्ते के साथ तुमने कुछ गलत किया है।
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इस दौरान अन्य राहगीर जानकारी देता है कि मंत्री ने यह कुत्ता नहीं रखा है। इस तरह से कहानी कुत्ते और मुआवजे के चक्कर में घूमती हुई दिखाई गई। नाटक में राजन थकयाल, महीक्षित सिंह, गोपी शर्मा, अंकुश, सचिन, नमित, शेखर, शिवम, मनीष, प्रियंका, रोमिका ने अहम भूमिका निभाई।
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