जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस सभी राजनीतिक दलों और आम लोगों को एक मंच पर लाएगी। इसके लिए पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को अधिकृत करते हुए गुपकार घोषणा का दायरा बढ़ाने का फैसला किया गया। साथ ही जम्मू, कश्मीर व लद्दाख में इसके लिए मुहिम शुरू करने का भी निर्णय किया गया। आगामी दिनों में पार्टी की गतिविधियों का रोडमैप भी तैयार किया गया। अनुच्छेद 370 हटने के लगभग साल भर बाद हुई पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) की पहली बैठक में शनिवार को राज्य के सियासी हालात तथा अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई।
श्रीनगर के पार्टी मुख्यालय नवा-ए-सुबह में पीएसी की बैठक सुबह फारूक अब्दुल्ला की अध्यक्षता में शुरू हुई। बैठक में आने वाले दिनों के लिए पार्टी द्वारा रोड मैप तैयार किया गया। इसके तहत जनपहुंच कार्यक्रम शुरू करते हुए घर-घर तक पहुंचने का फैसला किया गया। साथ ही तय किया गया कि जम्मू, कश्मीर और लद्दाख सभी को उसका हक मिलेगा। किसी के भी हक पर कोई दूसरा डाका नहीं डालेगा।
इसके अलावा गुपकार घोषणा को और मजबूत करने पर भी विचार किया गया। तय किया गया कि सभी राजनीतिक दलों और सिविल सोसाइटी के ग्रुप को एक साथ लेकर जम्मू-कश्मीर के लोगों से छीने गए सांविधानिक अधिकार की वापसी के लिए लंबी लड़ाई लड़ी जाएगी।
इसके साथ ही जम्मू, चिनाब और पीर पंजाल क्षेत्रों के साथ ही लद्दाख में पार्टी की गतिविधियों को और बढ़ाने का फैसला किया गया। इस दौरान राज्य की अर्थव्यवस्था पर चर्चा करते हुए कहा कि कृषि, बागवानी, पर्यटन, उद्योग-धंधे व हैंडीक्राफ्ट सेक्टर का बुरा हाल है। प्रशासनिक व्यवस्था चौपट है।
गुपकार आवास पर मिल चुके थे नेताओं से
पिछले सप्ताह फारूक अब्दुल्ला ने गुपकार स्थित आवास पर तीन दिनों में पार्टी के विभिन्न नेताओं के साथ मुलाकात की थी। उन्होंने उन नेताओं से मुलाकात की जिन्हें पिछले एक साल से हिरासत में रखा गया था और पार्टी ने उनकी हिरासत को अदालत में चुनौती दी थी। हालांकि, सरकार ने अदालत में कहा था कि उन नेताओं को हिरासत में नहीं रखा गया था और वे कहीं भी जाने के लिए आजाद थे। माना जा रहा है कि फारूक ने सरकार के दावों की सत्यता का पता लगाने के लिए नेताओं को बुलाया था।