1982 से 1984 तक उनके पुत्र डॉ. फारुख अब्दुल्ला मुख्यमंत्री रहे। 1987 के चुनाव डॉ. फारुख अब्दुल्ला की अध्यक्षता में हुए और नेशनल कांफ्रेंस 76 में से 40 सीटें जीती। डॉ. अब्दुल्ला दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 1990 से 1996 तक राज्यपाल शासन रहने के बाद हुए चुनावों में नेशनल कांफ्रेंस ने 87 में से रिकॉर्ड 57 सीटें जीतीं और डॉ. फारुख अब्दुल्ला तीसरे बार मुख्यमंत्री बने।
इसके बाद 2002 से 2005 और 2005 से 2009 तक पार्टी सत्ता से बाहर रही। लेकिन 2009 में हुए चुनावों में नेशनल कांफ्रेंस ने 87 में से 28 सीटें जीतकर कांग्रेस के साथ चुनाव के बाद हुए गठबंधन से सरकार बनाई और उमर अब्दुल्ला पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।